
marbal khadan
कटनी. जिले में खनिज संपदा के अंधाधुंध दोहन के बावजूद शासन को देय डेड रेंट (अनिवार्य भाटक) जमा नहीं किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। कटनी जिला में गिट्टी और मार्बल की 12 खदानों के संचालक बीते लगभग दो वर्षों से डेड रेंट का भुगतान नहीं कर रहे हैं, जिससे शासन के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा है।
खनिज विभाग की जांच में सामने आया है कि इन 12 खदान संचालकों पर कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की बकाया राशि है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई बड़े और स्थापित मार्बल कारोबारी हैं, इसके बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
विभाग द्वारा शुक्रवार को संबंधित सभी खदान संचालकों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय-सीमा के भीतर बकाया डेड रेंट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि तय अवधि में राशि जमा नहीं की जाती है, तो संबंधित खदानों के संचालन पर रोक लगाते हुए उन्हें बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, लगातार दो साल तक डेड रेंट जमा न होना विभागीय निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। नियमों के अनुसार खनिज उत्खनन की अनुमति तभी प्रभावी मानी जाती है जब निर्धारित भाटक और अन्य कर समय पर शासन के खाते में जमा किए जाएं।
प्रशासनिक स्तर पर यह मामला गंभीर माना जा रहा है और खनिज विभाग ने संकेत दिए हैं कि बकायादारों के खिलाफ आगे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। खदानों की सीलिंग, बैंक खातों की जांच और वसूली की वैधानिक प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। विभाग ने साफ कर दिया है कि खनिज संपदा पर किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और राजस्व से जुड़े मामलों में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
12 मार्बल, गिट्टी आदि की खदानों के संचालकों ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपए अनिवार्य भाटक जमा नहीं किया है। खदान संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। राशि जमा न करने की दशा में खदानों को बंद कराने व वसूली की कार्रवाई होगी।
Updated on:
22 Feb 2026 10:40 am
Published on:
22 Feb 2026 10:40 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
