कटनी

नदी पुनर्जीवन के लिए नहीं आ रहा बजट, कहीं रुका काम तो कहीं पड़ा धीमा इस साल नहीं बढ़ पाएगा वॉटर लेवल सहित नदी का जल स्तर

- जिले का लगातार घटता भूमिगत जल स्तर, जीवनदायनी कटनी नदी की हर वर्ष थम सी जा रहीं सांसें यह प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। शहर व जिलेभर में पेयजल सहित सिंचाई के पानी की भीषण समस्या होने के बाद भी इस समस्या से उबरने बेपरवाही हो रही है। - इस समस्या से निपटने के लिए 'नदी पुनर्जीवन' योजना शुरू की गई है, लेकिन यह भी बजट के अभाव में दम तोड़ रही है। सूत्रों की मानें तो जबसे से योजना के तहत जिले में काम शुरू हुआ है, मनरेगा में बजट ही नहीं आया। - आलम यह है कि अधिकांश स्थानों पर काम ठप सा पड़ गया है।

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Jul 27, 2019
Budget not coming up in river revival katni

कटनी. जिले का लगातार घटता भूमिगत जल स्तर, जीवनदायनी कटनी नदी की हर वर्ष थम सी जा रहीं सांसें यह प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। शहर व जिलेभर में पेयजल सहित सिंचाई के पानी की भीषण समस्या होने के बाद भी इस समस्या से उबरने बेपरवाही हो रही है। इस समस्या से निपटने के लिए 'नदी पुनर्जीवन' योजना शुरू की गई है, लेकिन यह भी बजट के अभाव में दम तोड़ रही है। सूत्रों की मानें तो जबसे से योजना के तहत जिले में काम शुरू हुआ है, मनरेगा में बजट ही नहीं आया। आलम यह है कि अधिकांश स्थानों पर काम ठप सा पड़ गया है। जानकारी के अनुसार कटनी नदी जिले के सभी छह ब्लॉकों में एक लाख 61 हजार हेक्टेयर से अधिक कैचमेंट एरिया है। यह नदी 96.4 किलोमीटर जिले की सीमा में बहती है। बारिश का सीजन समाप्त होते ही कुछ माह के बाद नदी की सांसें जगह-जगह से टूटने लग जाती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए ही नदी पुनर्जीवन प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत 1120 प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। जिसमें बोल्डर चैकडेम, गली प्लग, कंटूर ट्रैंच का काम होना था। इन प्रजोक्टों में काम करने वाले न तो मजदूरों का भुगतान हो रहा और ना ही मैटेरियल सप्लाई करने वालों का।

यह था इस योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहर वासियों की प्यास बुझाने के साथ किसानों के खेतों को पानी देना है। इसमें चैकडेम, गली प्लग, कंटूर ट्रैंच आदि के माध्यम से 60 प्रतिशत बारिश का पानी रोककर भूमि में समाहित करना था, ताकि वॉटर लेवल बढ़ सके। इसके अलावा बारिश व बारहमासी नालों को कटनी नदी से जोड़कर 0.6 मीटर तक पानी का लेवल बढ़ाना था ताकि नदी की धारा अविरल बहती रहे।

खास-खास:
- 115 माइक्रो वॉटर शेड पर होना था काम, अधिकांश पड़े हैं अधूरे।
- 305 गांव में चलना था नदी पुनर्जीवन योजना के तहत काम।
- जनवरी माह में शुरू किया गया था मनरेगा मद से काम।
- जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं पता काम की वास्तविक रिपोर्ट।

इनका कहना है
नदी पुनर्जीवन में मनरेगा मद से लाखों रुपये के काम हुए हैं। वास्तविक राशि कितनी है यह बता पाना मुश्किल है। मानव दिवस व सामग्री में राशि पंचायतों के माध्यम से खर्च हुई है। काम अभी चल रही है। कुछ जगह हो सकता है रुका हो। अभी भुगतान नहीं आया यह बात सही है।
डॉ. संतोष बाल्मिक, जिला मनरेगा अधिकारी।

जिले में पानी की गंभीर समस्या है। वॉटर लेवल भी काफी कम है। नदी पुनर्जीवन को लेकर जो भी काम शुरू कराए गए हैं वे बंद नहीं होंगे। उन्हें पूरा कराया जाएगा। काम में तेजी लाई जाएगी। भुगतान रुका है। इसके लिए शासन स्तर पर पहल करके काम को गति दी जाएगी।
शशिभूषण सिंह, कलेक्टर।

Published on:
27 Jul 2019 11:23 am
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