पार्षदों ने दर्ज कराई है परिषद में आपत्ति, आयुक्त को भी सौंपा है शिकायती पत्र, करोड़ों के निर्माण कार्यों में वित्तीय और तकनीकी गड़बडिय़ों के लगाए गए हैं आरोप, जो निर्माण कार्य हो चुके हैं उनके फिर हो गए टेंडर तो किसी निर्माण से मियाद पहले तोड़ चुके हैं दम
कटनी. नगर पालिक निगम का लोक निर्माण विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। निविदा प्रक्रिया, डामर सडक़ निर्माण, पुनरीक्षित प्राक्कलन और फाइलों के अवैध संधारण जैसे मामलों को लेकर गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। पार्षद राजेश भास्कर, ओमप्रकाश सोनी, विनोद यादव सहित अन्य ने भी नगर निगम के लोक निर्माण विभाग सहित अन्य विभागों में चल रहे मनमानी को लेकर बजट वाली परिषद की बैठक में भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नगर निगम आयुक्त को विस्तृत रिपोर्ट सौंपकर उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लोक निर्माण विभाग में नियमों को ताक पर रखकर कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे निगम को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। मामला अब निगम की कार्यप्रणाली और तकनीकी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। नगर निगम में बाहरी लोगों के हस्ताक्षेप, खास लोगों को उपकृत करने के चलते मनमानी की जा रही है। इसके अलावा वार्डों के विकास में मुंहदेखी कार्रवाई व फाइलों के गायब होने की गंभीर मुद्दा है।
जालपा देवी वार्ड क्रमांक-8 में 13.30 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक भवन में टाइल्स आदि कार्य के लिए जून 2025 में निविदा जारी हुई। तकनीकी प्रस्ताव जुलाई 2025 में खोल दिए गए, लेकिन वित्तीय प्रस्ताव करीब सात महीने बाद फरवरी 2026 में खोले गए। जिस कार्य के वित्तीय प्रस्ताव सात महीने तक लंबित रहे, वह काम पहले ही कराए जा चुके हैं। बाद में भुगतान को वैध बनाने के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी की गई।
गुरुनानक वार्ड में पेट्रोल पंप से सब्जी मंडी जाने वाली सडक़ पर पहले करीब 2.95 लाख रुपए का डामर पेंच रिपेयरिंग कार्य कराया गया। इसके कुछ ही समय बाद उसी सडक़ पर 22.62 लाख रुपए की लागत से दोबारा डामरीकरण का कार्य कर दिया गया। पहले पेंचवर्क और फिर पूरी सडक़ निर्माण की प्रक्रिया वित्तीय अनियमितता है। सवाल यह भी है कि जब पूरी सडक़ दोबारा बननी थी तो पहले पेंचवर्क क्यों कराया गया।
आजाद चौक से सुक्खन अखाड़ा और काली मंदिर से जैन मंदिर तक लगभग 27.37 लाख रुपए की लागत से डामर सडक़ बनाई गई। सडक़ निर्माण से पहले उसी मार्ग पर सीवर लाइन डाली गई थी, जिसके कारण कुछ ही दिनों में सडक़ क्षतिग्रस्त हो गई। सडक़ निर्माण कार्य परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में था, इसके बावजूद सुधार कार्य कराने के बजाय दूसरी निविदाओं के पेंचवर्क से सडक़ की मरम्मत दिखाकर बिल लगा दिए गए। काली मंदिर से जैन मंदिर तक सीवर लाइन डली ही नहीं थी, फिर भी वहां नई सडक़ बना दी गई।
स्वामी विवेकानंद वार्ड में 38.81 लाख रुपए की लागत से डामरीकरण कार्य कराया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह सडक़ अवैध कॉलोनी और निर्जन क्षेत्र में बनाई गई, जहां जन उपयोग लगभग नहीं के बराबर है। ऐसे में सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत में इसे सरकारी राशि के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
पार्षदों ने आयुक्त तपस्या परिहार से मांग की है कि सभी संदिग्ध निविदाओं और निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही पुनरीक्षित प्राक्कलनों, भुगतान प्रक्रिया और फाइलों के अवैध संधारण की भी जांच हो। उन्होंने मांग की कि जांच प्रतिवेदन आगामी निगम सम्मेलन में प्रस्तुत किए जाएं और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
इन सभी मामलों की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे।