कटनी

नवाचार: परंपरागत खेती छोड़ी, सब्जी अपनाई, खेत ने बदल दी किसान की किस्मत

टमाटर की लाली से हो रही लाखों की आमदनी, बहोरीबंद में पिता-पुत्र कमा रही लाखों रुपए
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Feb 08, 2026
Farmers are earning profits from tomato cultivation
Farmers are earning profits from tomato cultivation

कटनी. जिले के बहोरीबंद क्षेत्र के ग्राम अमगवा में एक किसान ने खेती को लेकर चली आ रही सोच को बदला है। कभी गेहूं और धान तक सीमित रहने वाली खेती आज टमाटर की लाली से लाखों की आमदनी दे रही है। यह कहानी है किसान कपूरा चौधरी की, जिन्होंने जोखिम उठाया, तरीका बदला और खेती को घाटे से मुनाफे की राह पर ले आए। कपूरा चौधरी बताते हैं कि पारंपरिक फसलों से खर्च तो निकल जाता था, लेकिन बचत नाम मात्र की होती थी। ऐसे में उन्होंने सब्जी उत्पादन की ओर रुख किया। शुरुआत में छोटे स्तर पर टमाटर लगाए, परिणाम अच्छे आए तो धीरे-धीरे तीन एकड़ में ड्रिप और मल्चिंग तकनीक अपनाई। इससे पानी की खपत घटी, खरपतवार पर नियंत्रण मिला और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई। खेती अब केवल कपूरा चौधरी की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी बन चुकी है। उनके पुत्र सोनू चौधरी भी खेत में बराबर हाथ बंटाते हैं। टमाटर के साथ गोभी, मूली, मटर और गर्मी में खीरे जैसी फसलें उगाकर साल भर खेत को खाली नहीं रहने दिया जाता। सोनू बताते हैं कि सब्जियों की खेती में मेहनत ज्यादा है, लेकिन आमदनी भी उसी अनुपात में बेहतर मिलती है।

हर सीजन 5 से 6 लाख की आमदनी

सोनू चौधरी ने बताया कि टमाटर की खेती में हर साल ड्रिप मल्चिंग पर करीब एक लाख रुपए और प्रति एकड़ 25 से 30 हजार रुपए का अतिरिक्त खर्च आता है। इसके बावजूद एक सीजन में 5 से 6 लाख रुपए की आमदनी हो जाती है। आसपास की मंडियों में कटनी के टमाटर की मांग ज्यादा होने से किसानों को उचित दाम मिल जाता है। आज कपूरा चौधरी का खेत उन किसानों के लिए उदाहरण बन गया है, जो खेती से निराश होकर दूसरे काम की ओर देख रहे हैं।

फाइल फोटो- पत्रिका

जिले के टमाटरों की कई जिलों में है मांग

हार्टीकल्चर एरिया प्रोडेक्शन इन्फारमेशन सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार जिले में टमाटर का रकवा 3 हजार 110 हैक्टेयर तथा उत्पादन लगभग 500 से 600 मैट्रिक टन अनुमानित है। टमाटर उत्पादन के नजरिये से जिले की अनुकूल परिस्थितियों के मद्देनजर यहां के टमाटर का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होता है, जिससे जबलपुर, शहडोल सहित आस-पास के जिलों की कृषि उपज मंडियों में इसकी खासी मांग बनी रहती है। अन्य जगहों के टमाटरों की तुलना में कटनी का टमाटर ज्यादा दिनों तक चलता है। इसलिए कटनी के टमाटर के जायके के दीवानों की संख्या जितनी कटनी में है, उससे कहीं अधिक संख्या अन्य जिलों में है।

Updated on:
08 Feb 2026 11:03 am
Published on:
08 Feb 2026 11:03 am