कटनी

सरकारी जमीनों का बड़ा घोटाला: जिन पर रोक, उन्हीं का सौदा, अब कैमोर नप अध्यक्ष के परिवार का नाम जुड़ा

नगर सुधार न्यास की अधिग्रहित करोड़ों की जमीन पर हुई खरीद-फरोख्त, अब निगम ने रजिस्ट्री रोकने और सीमांकन के लिए लिखे पत्र, नगरनिगम के पत्र से खुली घोटाले की परत

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Mar 29, 2026
Major scam of government land in Katni

कटनी. नगर सुधार न्यास (अब नगर निगम) की अधिग्रहित जमीनों पर चल रहे खेल में अब एक नया और बड़ा खुलासा सामने आया है। जिन विवादित जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने के लिए नगर निगम ने जिला पंजीयक को पत्र लिखा, उन्हीं करोड़ों जमीनों की हालिया खरीद-फरोख्त में कैमोर नगर परिषद के अध्यक्ष के परिवार का नाम जुडऩे से मामला और गर्मा गया है।
जानकारी के अनुसार, नगर सुधार न्यास ने वर्षों पहले शहर के विकास, आवासीय योजनाओं और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के लिए कई जमीनों का अधिग्रहण किया था। भूस्वामियों को मुआवजा दिया गया, हालांकि कई मामलों में यह आंशिक ही रहा। योजनाएं भले साकार नहीं हो सकीं, लेकिन जमीनें अब भी निगम के अधिग्रहण में हैं। इसके बावजूद अब इन जमीनों पर भूमाफियाओं की नजर है। आरोप हैं कि पुराने भूस्वामी नियमों को दरकिनार कर जमीनों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। इस पूरे मामले में नगर निगम के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। इस पूरे प्रकरण की शिकायत भी नगरनिगम आयुक्त तपस्या परिहार व कलेक्टर आशीष तिवारी से की गई है, जिसके बाद नगरनिगम ने जांच करते हुए पत्र लिखा है। नगरनिगम के पत्र से अब बड़ा खुलासा हुआ है।

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पुराना विवाद, नया सौदा

योजना क्रमांक 17 (ग्राम बरगवां, जबलपुर रोड) की जमीन का विवाद 1991 से चला आ रहा है। खसरा नंबर 209/4, 210/1 और 211/2 (करीब 3.453 हेक्टेयर) को 12 दिसंबर 1991 को तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा अधिग्रहण से मुक्त किया गया था, जिसे 18 जनवरी 1993 को निरस्त कर दिया गया। हाईकोर्ट ने 1993 में इस जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, जो आज भी प्रभावी बताया जाता है। 2006 में राज्य शासन ने भी साफ कर दिया कि 1991 की एनओसी अवैध थी। बिना शासन अनुमति जमीन को योजना से मुक्त करना अवैध था।

पहले इन्हें बेची जमीन

12 दिसंबर 1991 से 18 जनवरी 1993 के बीच पैट्रिक रॉबर्ट डन द्वारा लगभग 42 हजार वर्गफुट जमीन कई लोगों प्रवीण कुमार बजाज, रमेश चंद्र अग्रवाल, सुषमा देवी अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, उत्तमचंद जैन, पंकज गुप्ता, सुनील टहलरमानी, मनोज कुमार, प्रमोद, विनोद कुमार सहित अन्य को बेच दी गई। मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां 18 फरवरी 1993 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया, जो आज तक प्रभावशील बताया जा रहा है। बाद में 16 मई 2005 को हाईकोर्ट ने राज्य शासन को मामले में पुनर्विचार के निर्देश दिए। इसके बाद 30 जनवरी 2006 को आवास एवं पर्यावरण विभाग, भोपाल ने स्पष्ट कर दिया कि 12 दिसंबर 1991 की एनओसी वैधानिक नहीं थी।

अब कैमोर अध्यक्ष का परिवार बना मालिक

सरकार के इस फैसले के बावजूद जमीन के सौदे थमे नहीं। पैट्रिक रॉबर्ट डन और न्योलीन डन ने उप-पंजीयक कार्यालय में कथित रूप से झूठे और कूटरचित शपथपत्र प्रस्तुत कर 24 सितंबर 2025 को 8400 वर्गफुट जमीन पलक ग्रोवर और गगन ग्रोवर को बेची। इसके अलावा 22 अप्रैल 2025 और 26 मई 2025 को 6400-6400 वर्गफुट जमीन हरीश और दिलीप वतनानी को बेची गई। यही नहीं, बाद में हरीश और दिलीप वतनानी से इसी जमीन के टुकड़े कर 6 जुलाई 2025 को 3200-3200 वर्गफुट के हिस्से नामित, गगन, आस्था और पलक ग्रोवर द्वारा फिर से खरीद लिए गए। विदित हो कि पलक ग्रोवर नगर परिषद कैमोर की अध्यक्ष हैं।

निगम को खुद लगानी पड़ी रोक

सरकारी जमीन की खरीद फरोख्त होने के कारण स्थिति इतनी बिगड़ गई कि नगर निगम को 24 मार्च 2026 को जिला पंजीयक को पत्र लिखकर कहना पड़ा कि इन जमीनों की रजिस्ट्री बिना एनओसी के न की जाए। इससे पहले 2023 में भी ऐसा पत्र भेजा गया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। निगम ने जिन जमीनों पर रोक की बात कही है, उनमें योजना क्रमांक 11, 12, 13 (मेंहदी बंगला रोड, लखेरा) और योजना क्रमांक 17 (बरगवां) शामिल हैं। यानी वही जमीन, जिसका हाल ही में सौदा हुआ।

अब सीमांकन से बचाव की कोशिश

रजिस्ट्री पर रोक के साथ ही 25 मार्च को निगम ने सीमांकन कराने के निर्देश भी दिए हैं। संपदा शाखा के राजस्व अधिकारी द्वारा इस सबंंध में एसडीएम को पत्र लिखा गया है। जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इन खसरों की जमीनों का सीमांकन कराना आवश्यक है, ताकि जमीन की वास्तविक स्थिति, सीमा और स्वामित्व स्पष्ट हो सके। फिलहाल, नगर निगम की सक्रियता से मामला उजागर जरूर हुआ है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इस पूरे प्रकरण में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर मामला दबा दिया जाएगा। हालांकि कैमोर नगर परिषद अध्यक्ष पलक ग्रोवर के पति नमित ग्रोवर ने बताया कि उनके परिवार द्वारा जमीन खरीदी गई है। जमीन पर बैंक से लोन भी स्वीकृत है। इससे अधिक जानकारी उन्हें नहीं है।

इनका कहना

नगर सुधार न्यास की योजनाओं के लिए अधिग्रहित जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने के लिए पंजीयक को पत्र लिखा गया है। साथ ही एसडीएम को पत्र लिखकर सीमांकन की मांग की गई है। अधिग्रहित जमीन कैसे बिकी है, इसकी जांच की जा रही है। दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। निगम की संपत्ति सुरक्षित की जाएगी।

तपस्या परिहार, आयुक्त, नगरनिगम

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Published on:
29 Mar 2026 09:47 am
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