- छात्रसंघ चुनाव को लेकर कॉलेज के गलियारों, छात्र संगठन सहित विद्यार्थियों में चुनावी चर्चा सरगर्म है। अभी से सक्रिय युवा छात्रसंघ चुनाव के लिए कमर कस चुके हैं और तैयारी में जुट गए हैं। खास बात यह है कि इस बार होने वाले चुनाव को लेकर विद्यार्थियों के बीच से यह आवाज उठ रही है कि मौजूद चुनाव प्रणाली में बदलाव होना चाहिए। सीआर पद्धति से चुनाव न कराकर प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होना चाहिए।
कटनी. छात्रसंघ चुनाव को लेकर कॉलेज के गलियारों, छात्र संगठन सहित विद्यार्थियों में चुनावी चर्चा सरगर्म है। student story motivational अभी से सक्रिय युवा छात्रसंघ चुनाव के लिए कमर कस चुके हैं और तैयारी में जुट गए हैं। खास बात यह है कि इस बार होने वाले चुनाव को लेकर विद्यार्थियों के बीच से यह आवाज उठ रही है कि मौजूद चुनाव प्रणाली में बदलाव होना चाहिए। Student union election सीआर पद्धति से चुनाव न कराकर प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होना चाहिए। इसके पीछे विद्यार्थियों का तर्क है कि एक युवक व युवती पढ़ाई के क्षेत्र में बेहतर हो सकते हैं, लेकिन यह मानना सही नहीं कि वे नेतृत्व करने में भी माहिर हों। इस बात को लेकर मोहल्ला और छात्र राजनीति से आगे बढ़कर पार्षद, महापौर और दो बार से लगातार विधायक बनने वाले कटनी-मुड़वारा विधायक संदीप जायसवाल भी कह रहे हैं कि विद्यार्थी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव को जिस प्रणाली से चाहते हैं उस पर अमल होना चाहिए। मुड़वारा विधायक बचपन से ही राजनीति के रंगे में रंगे हैं। पड़ोस, मोहल्ला व स्कूल में किसी प्रकार का विवाद, कोई समस्या हो या फिर किसी को मदद की जरुरत, उस दौर से ही आगे बढ़े और अब शहर के विधायक हैं। संदीप जायसवाल 1976 में कक्षा सातवीं में सरस्वती स्कूल में पुस्तकालय प्रमुख बने यहां से सक्रिय राजनीति में कदम रखा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। तिलक कॉलेज में बी कॉम द्वितीय वर्ष के दौरान कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव में 1982 में सचिव बने। उसके बाद एम कॉम, एलएलबी करने के दौरान भी छात्र राजनीति में डटे रहे।
1994 में चुने गए पार्षद
1994 में संदीप जायसवाल पहली बार बीडी अग्रवाल वार्ड से पार्षद चुने गए। 1999 तक पार्षद रहे। इसी कार्यकाल में आखिरी के सात माह तक महापौर की कुर्सी संभाली। इस चुनाव में अपने प्रतिद्वंदी गोपी विश्वकर्मा को मात देकर पौने दो सौ मतों से जीत दर्ज की। इसके बाद 2000 से 2004 तक फिर गुरुनानक वार्ड से पार्षद बने। इसमें रमेश मोटवानी को हराकर जीत दर्ज की। 2005 में निर्दलीय महापौर का चुनाव लड़ा। इसमें 10 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की। कांग्रेस से राजाराम यादव व बीजेपी से उद्धव साहू को मात दी। इसके बाद फिर 2008 में निर्दलीय विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे। इसमें हार मिली, लेकिन हार नहीं मानी। 2013 में भाजपा से चुनाव लड़े और 47 हजार मतों से फिरोज अहमद को हराकर विधायक बने। 2018 में फिर मिथक को तोड़ते हुए विधानसभा की टिकट पाई और मिथलेश जैन को 16 हजार से अधिक मतों से हराकर फिर शहर विधायक हैं।
पढ़े-लिखे, सेवाभावी व समझदार युवा आएं आगे
छात्र राजनीति को लेकर विधायक संदीप जायसवाल ने भी बेबाकी से बात रखी। जब उनसे पूछा गया कि वर्तमान में जो छात्रसंघ चुनाव का मौजूदा सिस्टम है वह सही है तो उन्होंने कहा कि इसको लेकर छात्र तय करें कि वे आज के परिवेश में कैसा चुनाव चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य का बढिय़ा नेतृत्व तैयार करने की दृष्टि से चुनाव हों, अच्छे युवा इस दिशा में आगे बढ़ें, पढ़े-लिखे, समझदार, सेवाभावी, संवेदनशील युवा आगे आएं। उन्होंने कहा कि नेताओं के बच्चों के राजनीति में आने से कुछ नहीं होगा। राजनीति एक ऐसी जगह है जहां पर किसी को लाने से कुछ नहीं होता, निर्णय जनता करती है। जनता नहीं स्वीकार करेगी तो फिर कोई मतलब नहीं है। राजनीति में आते हैं और उनके गुण और काम जनता को सही दिखते हैं तो फिर लोग आगे बढ़ाते हैं।