मन्नतों से मांगी थी संतान, आज वही मां अपनों के इंतजार में वृद्धाश्रम की चौखट पर, मां के हाथों ने उंगली पकडकऱ चलना सिखाया, वही मां वृद्धाश्रम में अकेली, मदर्स-डे की पूर्व संध्या पर छलका माताओं का दर्द, अपनों से दूर आंखों में अब भी बेटों का इंतजार
बालमीक पांडेय @ कटनी. जिस मां ने अपनी कोख में नौ माह तक संतान को सहेजा, रात-रातभर जागकर उसे पाल-पोसकर बड़ा किया, उंगली पकडकऱ चलना सिखाया, उसके हर दर्द को अपना दर्द समझा, आज वही मां बुढ़ापे में अपनों के बिना वृद्धाश्रम की चौखट पर जिंदगी काट रहीं हैं। मदर्स-डे की पूर्व संध्या पर झिंझरी स्थित बच्चन नायक वृद्धाश्रम में जब माताओं से बातचीत हुई तो हर आंख में एक अधूरी प्रतीक्षा थी, शायद बेटा एक दिन लेने आएगा। किसी मां ने बेटे के लिए मंदिरों में माथा टेका था, किसी ने मन्नतें मांगी थीं, किसी ने अपनी भूख मारकर बच्चों का पेट भरा था, लेकिन समय ऐसा बदला कि वही बेटे मां का सहारा बनने के बजाय उन्हें घर से दूर छोड़ आए।
डबडबा आईं आंखें, कहा बच्चे खुश रहें...
बेटों के बारे में पूछते ही कई माताओं की आंखें आंसू से डबडबा आईं, गला रूंध गया, किसी ने बताया कि बहुओं के तानों ने जीना मुश्किल कर दिया, तो किसी ने कहा कि बेटों के पास अब उनके लिए समय नहीं बचा। सबसे मार्मिक बात यह रही कि इतना दर्द सहने के बाद भी मां के मन में बच्चों के लिए शिकायत कम और दुआ ज्यादा है। वृद्धाश्रम में रहने वाली माताएं अपनों की याद में हर दिन बीता रही हैं। त्योहार हो या मदर्स-डे, उनकी नजरें दरवाजे पर टिक जाती हैं। शायद कोई अपना मिलने आ जाए। इन माताओं की सेवा पूर्व विधायक सरोज बच्चन नायक एक मां की तरह कर रही हैं। रहने और खाने की सुविधा तो मिल रही है, लेकिन मां के दिल में जो खालीपन है, उसे कोई सुविधा नहीं भर सकती...।
रामसखी बाई (55) निवासी खलरी के पति की 9 साल पहले हो चुकी है, दो बच्चे संतोष और अशोक खेती-किसानी करते हैं, लेकिन मां को छोड़ दिया है। शकुन यादव (66) निवासी भट्टा मोहल्ला बताती हैं कि 2019 में पति विष्णु की मौत हो गई है। बेटा पंकज हलवाई है। बहु-बेटा ने प्रताडि़त किया तो घर छोडऩा पड़ा। इसी प्रकार ममता ताम्रकार (70) निवासी बरही ने कहा कि 16 साल पहले पति विजय की मौत हो गई है। एक बेटा है। बहु-बेटा की प्रताडऩा से घर छोडऩा पड़ा। वहीं गीता मिश्रा (55) रीवा ने बताया कि 20 साल पहले पति इस दुनिया से जा चुके हैं, दो बेटी हैं, मजबूरी में यहां रहना पड़ रहा है। शीला बाई (80) पुरैना पन्ना ने कहा कि पति की 155 साल पहले मौत हो चुकी है, दो बेटी हैं, जो अपने ससुराल में हैं।
इसी प्रकार बरगवां निवासी शांति सचदेवा पति पृथ्वीराज सिंह के साथ वृद्धाश्रम में रह रही हैं। बेटा जितेंद्र व बहु ख्याल नहीं रख रहे, जिसकारण यहां जीवन काट रहे हैं। करहिया जबलपुर निवासी सावित्री बाई (80) ने बताया कि 3 साल पहले पति की मौत हो गई है, प्रकाश व राजेंद्र दो बेटे व एक बेटी है। बहुएं प्रताडि़त करती हैं, बेटे भी ध्यान नहीं दे रहे। विवश होकर वृद्धाश्रम में रहना पड़ रहा है। इसी प्रकाश शकुंतला खरे लालमाटी जबलपुर पति की मौत के बाद देखरेख करने वाला कोई नहीं हैं, बेटी ससुराल हैं। शरीर शिथिल है तो वृद्धाश्रम में जीवन काटन पड़ा रहा है।