
कटनी. गरीबों को 5 रुपए में भरपेट भोजन कराने के लिए बस स्टैंड में दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना 7 अप्रैल 2017 से शुरू की गई थी। 18 माह तक ठेकेदार को नगर निगम ने भुगतान नहीं किया। इस संबंध में ठेकेदार विपिन बिलौहा ने 24 से अधिक बार पत्राचार अधिकारियों को किया। राजीव शर्मा अपर सचिव मप्र शासन नगर विकास एवं आवास विभाग, विवेक अग्रवाल आयुक्त सह सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, एसएस राजपूत मिशन संचालक दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी अजीविका मिशन मप्र शासन, अपर सचिव मप्र शासन वित्त विभाग, मुख्य सचिव समन्वयक कार्यालय मंत्रालय, प्रमुख सचिव मप्र शासन, मुख्य सचिव मप्र शासन खाद्य विभाग सहित कलेक्टर और आयुक्त को कई बार पत्राचार के माध्यम से भुगतान सहित सुविधाएं मुहैया कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। कलेक्टर केवीएस चौधरी और आयुक्त टीएस कुमरे सहित सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की, लेकिन समस्या बताकर शिकायत का गलत तरीके से निराकरण किया जाता रहा। ठेकेदार विपिन विलौहा ने आयुक्त को 18 सिंतंबर पत्र खिलाकर बताया था कि उन्हें नमक नहीं मिला, अगस्त माह का खाद्यान जारी नहीं किया एवं पूर्व का भुगतान लंबित है यदि 30 सितंबर तक भुगतान नहीं होता तो वे केंद्र संचालित करने में अस्मर्थ रहूंगा। 4 अक्टूबर को भुगतान आधा-अधूरा होने पर 13 अक्टूबर से खाना बनाना ठेकेदार ने बंद कर दिया। इसके बाद नगर निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था की है। हैरानी की बात तो यह है कि डेढ़ साल से बगैर भुगतान के ठेकेदार गरीबों को भोजन करा रहा था और जब भुगतान के लिए आवाज उठाई तो नगर निगम आयुक्त भुगतान रोककर परेशान करने लगे, जिससे परेशान होकर ठेकेदार ने काम बंद दिया। अभी भी ठेकेदार का 7 लाख रुपए का भुगतान अटका हुआ है।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
3 अक्टूबर को पत्रिका ने बस स्टैंड स्थित रैन बसेरा में गरीबों के लिए संचालित दीनदयाल की रसोई की पड़ताल की थी। यहां पर गुणवत्ताविहीन बगैर सब्जी का भोजन बना था। इस पर वहां ठेकेदार विपिन बिलौहा का कहना था कि नगर निगम द्वारा डेढ़ साल से भुगतान नहीं किया गया और सुविधाएं नहीं दी, इसलिए गुणवत्ता कम हो गई है, लेकिन भोजन बेहतर दिया जा रहा है। 7 अप्रैल 17 से केंद्र चालू रहा, शुरू के तीन माह में आधा भुगतान हुआ था, नगर निगम ने कोई भुगतान नहीं किया गया। 30 जुलाई 2018 तक के बिल नगर निगम में जमा थे, एक माह में लगभग 60 हजार से सवा लाख रुपए तक बिल बनता रहा है, 10 लाख रुपए से अधिक का भुगतान लंबित है, लेकिन आयुक्त भुगतान नहीं करा रहे है। इसके अलावा डेढ़ साल से नमक का आवंटन, नहीं मिला था। 10 रुपए प्रति हितग्राही के मान से भुगतान की बात हुई थी, लेकिन भुगतान 5 रुपए के हिसाब से ही किया गया। अनुबंध की तारीख भी नहीं बढ़ाई जा रही थी।
यह रही रविवार की स्थिति
रविवार से नगर निगम द्वारा कमलेश दुबे निवासी कैलवारा को अंत्योदय की रसोई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसकी निगरानी ननि के अतिक्रमणदस्ता प्रभारी महेंद्र शर्मा कर रहे हैं। रविवार की दोपहर 3 बजे तक मात्र 35 लोगों को ही खाना मिल पाया था, लोग वहां पर काफी समय से भोजन का इंतजार कर रहे थे, छोटे से कुकर और तबेला में फिर से खाना चढ़वाया गया था। जबकि प्रतिदिन यहां पर 200 से 300 जरुरतमंद लोग भोजन करते थे।
इनका कहना है
ठेकेदार द्वारा बगैर किसी सूचना के शनिवार को भोजन नहीं बनाया गया। वह खुद ही सामान लेकर चला गया है। लापरवाही मानते हुए ठेकेदार से काम छीन लिया गया है। अन्य ठेकेदार से काम कराया जा रहा है। रविवार से नई व्यवस्था लागू की गई है। रही बात भुगतान की तो वह हो जाएगी।
टीएस कुमरे, आयुक्त नगर निगम।
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मेरी जानकारी के अनुसार ठेकेदार खुद काम छोड़कर चला गया है। भुगतान क्यों लंबित रहा है इसको लेकर चर्चा करेंगे और उसका संपूर्ण भुगतान कराएंगे। वहां पहुंचने वाले लोगों को परेशानी न हो इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
केवीएस चौधरी, कलेक्टर।