मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में नए नियम, जिला स्तर पर एक विवाह कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति मिलेगी प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से
कटनी. गरीब, निराश्रित और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना 2006 में शुरू की, इस योजना का लाभ जिले के हजारों लोगों ने उठाया, लेकिन कुछ साल से यह योजना सुस्त होती जा रही है, जिसका प्रभाव जरुरतमंदों पर पड़ रहा है। इस वित्तीय वर्ष में अबतक सिर्फ दो स्थानों पर आयोजन हुए हैं। अक्षय तृतीय पर बड़वारा जनपद व विजयराघवगढ़ में आयोजन किया गया है। बड़वारा में 98 व विजयराघवगढ़ में 91 जोड़ों का विवाह हो गया है। पहले जनपदें व निकाय तैयारी कर मुहूर्त के अनुसार कभी भी आयोजन कर लेते थे, लेकिन अब सिर्फ तीन मूहूूर्त में ही विवाह होंगे। अब सरकार द्वारा बंदिशें लगा दी गई हैं। एक मूहूर्त अक्षय तृतीया निकल गया है। अब दो मूहूर्त तुलसी विवाह और बसंत पंचमी शेष हैं, जिनमें आयोजन होगे।
जानकारी के अनुसार 2026-27 में 189, 2025-26 में 223 जोड़ों का विवाह हुआ है। इसी प्रकार 2024-25 में 516, 2023-24 में 339, 2022-23 में 289, 2020-21 में 62, 2019-20 में 438, 2018-19 में 101, 2017-18 में 169, 2018-19 में 324, 2016-17 में 600, 2015-16 में 259, 2014-15 में 116, 2013-14 में 286 वर-वधु के विवाह हुए हैं।
मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत वर्ष 2006 में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य गरीब, निराश्रित और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के सामूहिक विवाह में आर्थिक सहायता प्रदान करना है। वर्तमान में इस योजना के तहत प्रति वधू कुल 55,000 रुपए की सहायता दी जाती है। इसमें 49 रुपए सीधे वधू के खाते में दिए जाते हैं, जबकि 6 हजार रुपए प्रति जोड़ा आयोजन कराने वाली संस्था/निकाय को व्यवस्था खर्च के लिए दिए जाते हैं। पूर्व में योजना के तहत नवविवाहित जोड़ों को घरेलू उपयोग की सामग्री और उपहार भी दिए जाते रहे हैं, जिनमें आमतौर पर बर्तन, पलंग, गद्दा, अलमारी, सिलाई मशीन, पंखा और अन्य गृहस्थी का सामान शामिल रहता था। अलग-अलग समय में यह सामग्री स्थानीय प्रशासन और बजट के अनुसार बदलती रही है।
सामाजिक न्याय विभाग के अनुसार अब मुख्यमंत्री कन्या विवाह व निकाह योजना के तहत यह भी निर्णय लिया गया है कि एक ही मुहूर्त पर एक जिले में 200 से अधिक वर-वधुओं का विवाह नहीं किया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया है, ताकि अव्यवस्था न हो।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह आयोजन के लिए एक कार्यक्रम जिला स्तर पर कराया जा सकेगी। इसके लिए प्रभारी मंत्री के अनुमोदन की आवश्यकता होगी। इसके लिए विभाग द्वारा प्रस्ताव बनाकर भेजा जा रहा है।