कटनी

Organic agriculture: इस जिले के विद्यार्थी 60 घंटे में सीखेंगे जहरमुक्त कृषि, लेंगे इस विशेष खेती का मंत्र

- स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ भोजन बहुत ही आवश्यक है। आधुनिक दौर में फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए अंधाधुंध हो रहा रासायनिक खाद और कीटनाशक का उपयोग घातक हो गया है। - सब्जी, फल से लेकर फसलों में बड़ी मात्रा में किसान इनका उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में आहार को सुधार बहुत जरुरी है। यह तभी संभव है जब किसान व लोग इसका दुष्परिणाम समझेंगे और रासायनिक उत्पादों से मुंह मोडेंग़े। - इसी को लेकर बरही कॉलेज में खास पहल शुरू होगी।

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Aug 18, 2019
Organic agriculture training will be given to Collage students
Organic agriculture training will be given to Collage students

कटनी. स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ भोजन organic agriculture बहुत ही आवश्यक है। आधुनिक दौर में फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए अंधाधुंध हो रहा रासायनिक खाद और कीटनाशक का उपयोग घातक हो गया है। training in organic agriculture सब्जी, फल से लेकर फसलों में बड़ी मात्रा में किसान इनका उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में आहार को सुधार बहुत जरुरी है। यह तभी संभव है जब किसान व लोग इसका दुष्परिणाम समझेंगे और रासायनिक उत्पादों से मुंह मोडेंग़े। इसी को लेकर बरही कॉलेज में खास पहल शुरू होगी। जैविक कृषि एक्सपर्ट आरएस दुबे 30 दिनों तक विद्यार्थियों को दो घंटे तक प्रशिक्षण देंगे। यह प्रशिक्षण 19 अगस्त से शुरू होगा। स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना उच्च शिक्षा विभाग मप्र शासन भोपाल द्वारा जैविक खेती द्वारा स्वरोजगार स्थापित करने छात्र-छात्राओं को एक माह के प्रशिक्षण के लिए निर्देश मिले हैं। डॉ सुनील बाजपेयी तिलक कॉलेज कटनी के मार्गदर्शन में जैविक कृषि पाठशाला नैगवां के संचालक रामसुख दुबे प्रशिक्षण देंगे। विद्यार्थियों को दुबे पुस्तकीय ज्ञान के साथ जहरमुक्त खेती का मंत्र देंगे। विद्यार्थियों को जैविक खेती, उसकी आवश्यकता एवं जीरो बजट फॉर्मिंग, मिट्टी परीक्षण, पोषक तत्वों की जानकारी एवं मिट्टी नमूना लेने का प्रायोगिक प्रदर्शन कराया जाएगा। गोमूत्र का जैविक खेती में उपयोग, पोषक तत्वों की उपलब्धता, बीज उपचार, कंद उपचार, पौध उपचार एवं भूमि उपचार में उपयोग गोमूत्र का व्यवसायिक उत्पादन के लिए शुद्धीकरण, मानव स्वास्थ्य में उपयोग, यंत्र की जानकारी दी जाएगी। गोबर कंपोस्ट बनाने की विभिन्न विधियां, ट्राइकोडर्मा फफंूद नाशक का जैविक खेती में प्रयोग की विधियां, उत्पादन विधि की जानकारी दी जाएगी।

यह भी मिलेगी जानकारी
इसके अलावा केंचुआ खाद निर्माण एवं स्वरोजगार स्थापित करने व्यवसायिक उत्पादन की विधि बताई जाएगी। फोरपिट केंचुआ खाद निर्माण, नाडेप टाका खाद, पक्का नाडेप, टकिया नाडेप एवं भू-नाडेप निर्माण की जानकारी, नील हरित काई, हरी खाद उत्पादन के व विभिन्न फसलों के उपयोग, बायोगैस संयंत्र इस स्लरी, संयंत्र निर्माण की तकनीकी जानकारी दी जाएगी। प्रकाश खाद एवं ईंधन उपयोग के लिए प्रशिक्षण, पौध वर्धक के लिए वर्मीवाश के निर्माण का प्रशिक्षण, जैविक उर्वरक खाद एवं समाधि खाद निर्माण सहित फसलों में कम लागत से अधिक उत्पादन बढ़ाने के तरीके का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उद्यानिकी का भी प्रशिक्षण
शीघ्र खादें, मटका खाद, जीवामृत, अमृत संजीवनी, अमृत भभूत बनाने एवं फसलों के उपयोग का प्रयोग, उत्पादन बढ़ाने एवं उत्पादन एवं उत्पादन का तरीका, उपयोग का तरीका, नीम का जैविक खेती में कीटनाशक बनाने के लिए एवं पांच पत्ती का उपयोग एवं प्रशिक्षण, दीमक नियंत्रण, जैविक दीमक नियंत्रण, जैविक उगरा नियंत्रण, अनाज भंडारण, गाय के मठा जैविक कीटनाशकों आदि की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उद्यानिकी की फसलों सब्जियों एवं औषधीय पौधों की जानकारी एवं व्यवसायिक उत्पादन, पाली हाउस एवं योजनाओं की जानकारी एवं मार्केटिंग की जानकारी दी जाएगी।

Published on:
18 Aug 2019 03:39 pm