कटनी

धान मिलिंग ठप: कटनी में 4.94 लाख मीट्रिक सहित संभागभर में लाखों टन चावल बनाने का काम अटका

मिलर्स की मांगों पर सहमति नहीं, गोदाम खाली न होने से गेहूं भंडारण पर भी मंडराएगा संकट, नागरिक आपूर्ति निगम मुख्यालय व सरकार नहीं दे रही ध्यान

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Feb 22, 2026
सरकारी चावल की तस्करी (Photo Patrika)

कटनी. प्रदेश के साथ-साथ कटनी जिला एवं संभाग के अन्य जिलों में धान की मिलिंग लगभग ठप पड़ी हुई है। नाममात्र की मिलिंग ही हो पा रही है। मिलर्स अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और विभाग व सरकार से अब तक कोई ठोस निष्कर्ष न निकलने के कारण मिलिंग कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। जिले में अकेले लगभग 4 लाख 94 हजार मीट्रिक टन धान की मिलिंग प्रस्तावित है। जिले में कुल 117 राइस मिलें हैं, जिनमें से केवल 83 मिलर्स ने ही अनुबंध किया है। कुछ मिलर्स ने धान का उठाव भी कर लिया है, लेकिन शर्तें पूरी न होने का हवाला देते हुए सरकार के गोदामों में चावल जमा नहीं कर रहे हैं।
मिलर्स का कहना है कि उन्हें पल्लेदारी के नाम पर मात्र 4.76 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान किया जा रहा है, जबकि वास्तविक खर्च 24 से 25 रुपए प्रति क्विंटल तक आता है। परिवहन भाड़े को लेकर भी असंतोष है। 15 किलोमीटर का परिवहन खर्च लगभग 1800 रुपये पड़ता है, लेकिन भुगतान केवल 8 किलोमीटर के हिसाब से किया जा रहा है। ऊपर से ट्रकों की दो-दो दिन की हॉल्टिंग से अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। सबसे गंभीर मुद्दा चावल रिकवरी का है। मिलर्स के अनुसार एक क्विंटल धान से औसतन 40 से 45 किलो चावल निकल रहा है, जबकि सरकार 67 किलो चावल जमा कराने की शर्त रख रही है। इससे लगभग 27 किलो की चपत मिलर्स को उठानी पड़ रही है। हाइब्रिड धान में ब्रोकन चावल की मात्रा अधिक होने से स्थिति और खराब हो गई है, जिस कारण कई मिलर्स ने मिलिंग पूरी तरह बंद कर दी है। फिलहाल केवल मंडला जिले में मिलिंग जारी है। मिलर्स ने खाद्य विभाग एवं नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से खाद्य मंत्री से भी मुलाकात की, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। यदि समय पर मिलिंग नहीं हुई तो गोदाम खाली नहीं होंगे और आगामी गेहूं भंडारण में भारी परेशानी खड़ी हो सकती है। साथ ही खुले में रखी धान के खराब होने और औने-पौने दाम में नीलामी की आशंका भी बढ़ गई है।

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हर माह है 20 हजार क्विंटल की खपत

जिलेभर में साढ़े 9 लाख पीडीएस के हितग्राही हैं। प्रति सदस्य दो किलोग्राम चावल दिया जाता है। हर माह जिले में 20 हजार क्विंटल चावल खपत हो रहा है। समय पर मिलिंग नहीं होगी तो आने वाले समय में चावल की भी शॉर्टेज होगी।

कई जिलों में जता है कटनी का चावल

कटनी का चावल कई जिलों में जाता है। जानकारी के अनुसार इंदौर, भोपाल, शिवपुरी, डबरा, भिंड, मुरैना, धार, टीकमगढ़, निमाड़ी, छतरपुर, रायसेन, पन्ना, दमोह, सागर, सिवनी, अलीराजपुर सहित अन्य जिलों में डिमांड अनुसार चावल की सप्लाई रैक के माध्यम से की जाती है। ऐसे में अन्य जिलों की भी सप्लाई प्रभावित होगी।

यह है संभाग की स्थिति (धान मीट्रिक टन में)


जिला मिलर्स अनुबंधित धान का उठाव जमा चावल
छिंदवाड़ा 22 11 16887 2237
डिंडौरी 15 07 19744 716
कटनी 117 83 43862 114
सिवनी 114 00 00 00
बालाघाट 215 41 37194 00
नरसिंहपुर 39 00 00 00
जबलपर 108 06 6062 00
मंडला 82 61 128601 16045

Rice (Representational Photo)

संभाग की यह है स्थिति

जबजपुर संभाग में 712 मिलर्स पंजीकृत हैं। 62728 मैट्रिक टन प्रतिदिन मिलिंग क्षमता है, लेकिन अभी तक सिर्फ 209 मिलर्स ने अनुबंध किया है। 252352.40 एमटी धान का अनुबंध किया गया है, 129293 एमटी के डीओ जारी हो चुके हैं, 103134 एमटी धान का उठाव किया गया है, 26158 एमटी धान का उठाव अनुबंध अनुसार शेष है। 69100 एमटी चावल मिलर्स को जमा करना है, लेकिन अबतक सिर्फ 19113 मीट्रिक टन ही चावल जमा किया गया है।

कटनी में हुई है बंपर खरीदी

कटनी जिले में 58 हजार 875 किसानों से 4 लाख 94 हजार 46 मैट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। 1170.39 करोड़ रुपए की धान खरीदी गई है। 1118.11 करोड़ रुपए का भुगतान 56463 किसानों को कर दिया गया है, जबकि 52.28 करोड़ रुपए का भुगतान अभी भी शेष है।

वर्जन

जिले के कई मिलर्स ने अनुबंध किया है। धान का उठाव भी कर चुके हैं। चावल के लॉट भी जमा कर रहे हैं। 144.72 मीट्रिक टन चावल जमा कर चुके हैं। मिलर्स की मांगों को लेकर विभाग को निर्णय करना है।

देवेंद्र तिवारी, डीएम नान।

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Published on:
22 Feb 2026 10:08 am
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