पत्रिका टॉक शो में केंद्रीय बजट पर मंथन, युवाओं-खिलाडिय़ों, शहरवासियों ने रखीं अहम अपेक्षाएं
कटनी. पत्रिका टॉक शो में शहर के युवाओं, खिलाडिय़ों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच केंद्रीय बजट को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने मौजूदा आर्थिक हालात पर अपनी राय रखते हुए महंगाई और बेरोजगारी को सबसे बड़ी चुनौती बताया। वक्ताओं का कहना था कि बजट में आम आदमी को राहत देने वाले ठोस प्रावधान होने चाहिए, ताकि रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें नियंत्रित हो सकें और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलें।
चर्चा के दौरान उच्च शिक्षा को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने, सरकारी कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और शोध को बढ़ावा देने की मांग उठी। बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जिला स्तर पर आधुनिक अस्पताल, पर्याप्त डॉक्टर-स्टाफ और सस्ती दवाओं की व्यवस्था पर जोर दिया गया। इसके साथ ही स्किल डेवलपमेंट को रोजगार से जोडऩे, स्थानीय उद्योगों और स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन देने की बात प्रमुखता से सामने आई। महिलाओं की सुरक्षा, अपराधमुक्त समाज के निर्माण और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान तय करने की मांग भी टॉक शो में उभरी। कुल मिलाकर प्रतिभागियों ने ऐसा बजट चाहा जो विकास के साथ-साथ सामाजिक संतुलन और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करे।
खिलाडिय़ों और युवा प्रतिनिधियों ने हर जिले में खेल सुविधाओं, खेल मैदानों, कोचिंग और प्रतियोगिताओं के लिए अलग बजट तय करने की मांग की। योग, फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए स्कूल-कॉलेज स्तर पर योजनाएं लागू करने का सुझाव दिया गया। सामाजिक पक्ष पर चर्चा करते हुए धर्म, नैतिक शिक्षा और अध्यात्म को जीवन मूल्यों से जोडऩे की बात कही गई।
जबसे केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकारें हैं, तब से देश में तेजी से काम हो रहा है। गरीबों, सामान्य वर्ग, मध्यम वर्ग से लेकर अंतिम छोर तक के व्यक्ति के लिए काम कर रही है। फरवरी में आने वाला बजट हर वर्ग को राहत देने वाला होगा। भारत दुनिया का विश्वगुरु बनेगा।
पिछले कई वर्षों से जनता के हित में बजट जारी हो रहा है। हर वर्ग के लोगों को लाभ मिला है। देश और प्रदेश में ऐसा बजट लाया जाए, जिसमें लोगों को और अधिक फायदा मिले व विकास हो।
जो बजट अबतक पूर्व के वर्षों में आया है वह मिलाजुला रहा। मध्यमवर्गीय परिवार बहुत पिस रहा है। वह सिर्फ टैक्स देने का काम कर रहा है। शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में आज भी लोग परेशान हैं।
केंद्रीय बजट से युवाओं को सबसे ज्यादा उम्मीद है। शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार की गारंटी या कौशल आधारित अवसर मिलें, यही हमारी मांग है। स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और डिजिटल स्किल्स पर निवेश बढऩा चाहिए।
महंगाई कम होगी तो बचत और उपभोग दोनों बढ़ेंगे। खेल और फिटनेस पर खर्च बढ़ाकर स्वस्थ युवा तैयार किए जा सकते हैं। बजट में महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष प्रावधान जरूरी हैं।
कामकाजी महिलाओं के लिए क्रेच, सुरक्षित परिवहन और स्वास्थ्य बीमा पर फोकस होना चाहिए। स्व-सहायता समूहों को सस्ता ऋण मिले, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। हर जिले में खेल अकादमी, स्टेडियम और प्रशिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए।
प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को छात्रवृत्ति और सरकारी नौकरी में और प्राथमिकता मिले। खेल बजट बढ़ेगा तो देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन होगा। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार सबसे जरूरी है। कॉलेजों में लैब, लाइब्रेरी और रिसर्च फंड बढ़े।
फीस कम हो और मेधावी छात्रों को ज्यादा स्कॉलरशिप मिले, तभी शिक्षा सबके लिए सुलभ होगी। स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर जिला अस्पतालों को अत्याधुनिक बनाया जाए। डॉक्टर-नर्स की कमी दूर हो, दवाएं सस्ती मिलें।
बजट में नैतिक शिक्षा, योग और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए। समाज में सकारात्मक मूल्यों का विकास होगा तो अपराध अपने-आप घटेंगे। महंगाई नियंत्रण और टैक्स सरलीकरण जरूरी है।
स्किल डेवलपमेंट को शिक्षा से जोड़ा जाए। इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट पर बजट प्रावधान हों, जिससे पढ़ाई के साथ काम का अनुभव मिले। कृषि बजट बढ़े, सिंचाई और फसल बीमा मजबूत हो। ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि-आधारित रोजगार योजनाएं शुरू हों।
पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा और दवाओं में राहत मिले। बुजुर्गों के लिए अलग स्वास्थ्य योजनाएं हों। स्टार्ट-अप्स के लिए टैक्स में छूट, आसान ऋण और मेंटरशिप जरूरी है। इससे नवाचार और रोजगार दोनों बढ़ेंगे।
योग और फिटनेस को स्कूल स्तर से अनिवार्य किया जाए। इसके लिए प्रशिक्षकों की भर्ती और बजट प्रावधान हों, ताकि स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। इस पर सरकारों को ध्यान देना चाहिए।
पिछले कुछ वर्षों से बजट राहत वाला आ रहा है। हर वर्ग को लाभान्वित किया जा रहा है। युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार से जोडऩे सहित स्किल डेवलपमेंट पर ज्यादा फोकस हो।