6779 करोड़ की परियोजना को केंद्र ने घोषित किया स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट, कोयला-सीमेंट उद्योग और माल परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार
शिवप्रताप सिंह @ कटनी. मध्यभारत के औद्योगिक नक्शे को बदलने वाली एक बड़ी रेलवे परियोजना अब तेजी से जमीन पर उतरने जा रही है। पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी योजना निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। करीब 264.070 किलोमीटर लंबे इस मल्टीट्रैक रेल कॉरिडोर पर लगभग 6779.87 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को रेलवे संशोधन अधिनियम 2008 के तहत स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट घोषित कर दिया है, जिससे इसे प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर विशेष प्राथमिकता मिल गई है। हाल ही में जारी गजट नोटिफिकेशन के बाद अब परियोजना में भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरण स्वीकृतियों और निर्माण प्रक्रियाओं में तेजी आने की संभावना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह सिर्फ अतिरिक्त रेल लाइन बिछाने का काम नहीं, बल्कि मध्यभारत के लिए एक नए हाई कैपेसिटी फ्रेट कॉरिडोर की नींव है, जो आने वाले समय में देश के सबसे महत्वपूर्ण माल परिवहन मार्गों में शामिल हो सकता है।
यह महत्वाकांक्षी रेल कॉरिडोर कटनी, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली जिलों से होकर गुजरेगा। परियोजना पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल के अंतर्गत विकसित की जा रही है। पूरे प्रोजेक्ट के तहत लगभग 578.675 किलोमीटर ट्रैक विकसित किए जाएंगे। रेलवे ने इसे चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। नई लाइनों को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है। रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम परिचालन गति 130 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रखने की योजना है। इसके अलावा कई स्टेशनों पर लॉन्ग हॉल लूप, आधुनिक यार्ड सिस्टम और हाई कैपेसिटी सिग्नलिंग नेटवर्क विकसित किया जाएगा ताकि लंबी मालगाडिय़ों का संचालन बिना रुकावट हो सके।
सिंगरौली देश की सबसे बड़ी कोयला और ऊर्जा उत्पादन बेल्ट में शामिल है। यहां स्थित खदानों और पावर प्लांट्स से प्रतिदिन हजारों टन कोयला, फ्लाई ऐश और अन्य औद्योगिक सामग्री देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजी जाती है। दूसरी ओर कटनी क्षेत्र सीमेंट, बॉक्साइट, चूना पत्थर और अन्य खनिज आधारित उद्योगों का बड़ा केंद्र माना जाता है। वर्तमान में इस रेलखंड पर भारी ट्रैफिक दबाव बना रहता है। कई बार मालगाडिय़ों की लंबी कतारों के कारण यात्री ट्रेनों को भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। रेलवे सूत्रों के अनुसार तीसरी और चौथी लाइन बनने के बाद इस सेक्शन की माल ढुलाई क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इससे उद्योगों को समय पर रैक उपलब्ध होंगे और लॉजिस्टिक लागत में बड़ी कमी आने की संभावना है।
रेलवे के सर्वे दस्तावेजों में अनुमान जताया गया है कि परियोजना के शुरू होने के पहले ही वर्ष में प्रतिदिन लगभग 19 अतिरिक्त मालगाडिय़ों और 6 नई यात्री, मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन की क्षमता विकसित हो जाएगी। इससे न केवल कोयला और सीमेंट परिवहन को गति मिलेगी, बल्कि मध्यप्रदेश की औद्योगिक सप्लाई चेन भी मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर मध्यभारत के लिए वैसी ही भूमिका निभा सकता है जैसी पश्चिमी और पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर देश के अन्य हिस्सों में निभा रहे हैं। इससे उद्योगों को तेज, सस्ता और निरंतर परिवहन नेटवर्क मिलेगा।
नई रेल लाइन का प्रभाव सडक़ परिवहन पर भी दिखाई देगा। अभी बड़ी मात्रा में कोयला और औद्योगिक सामग्री ट्रकों के जरिए हाईवे से भेजी जाती है, जिससे सडक़ों पर दबाव बढ़ता है। रेलवे कॉरिडोर बनने के बाद भारी माल परिवहन का बड़ा हिस्सा रेल नेटवर्क पर शिफ्ट हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे हाईवे पर ट्रकों की संख्या घटेगी, सडक़ दुर्घटनाओं में कमी आएगी और डीजल खपत कम होने से प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा भारी वाहनों के दबाव से खराब होने वाली सडक़ों के रखरखाव पर होने वाला सरकारी खर्च भी घट सकता है।
परियोजना निर्माण के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। रेलवे ट्रैक, पुल, यार्ड, सिग्नलिंग और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में स्थानीय श्रमिकों और निर्माण एजेंसियों को काम मिलेगा। साथ ही भविष्य में रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से औद्योगिक निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि कटनी-सिंगरौली कॉरिडोर विकसित होने के बाद मध्यप्रदेश का पूर्वी हिस्सा देश के सबसे मजबूत औद्योगिक लॉजिस्टिक जोन में बदल सकता है।
न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल के अंतर्गत तैयार की जा रही है। पूरे प्रोजेक्ट में लगभग 578.675 किलोमीटर ट्रैक विकसित किए जाएंगे। परियोजना को चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वे का कार्य किया जा रहा है।