कटनी

कटनी-मुड़वारा के बीच 100 साल पुरानी डायमंड क्रॉसिंग बदली, ट्रेनों की रफ्तार हुई दोगुनी

अंग्रेजों के जमाने की तकनीक हटाकर आधुनिक ट्रैक सिस्टम लागू, यात्रियों को समय की बड़ी राहत, लुधियाना और ग्वालियर से मंगाए गए पाट्र्स, नई 60 किलो रेल लाइन से बढ़ी क्षमता

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Apr 22, 2026
Railways Replaces Diamond Crossing to Increase Train Speeds

कटनी. कटनी से मुड़वारा के बीच रेलवे ने एक बड़ा तकनीकी बदलाव करते हुए करीब 100 साल पुरानी डबल डायमंड क्रॉसिंग को बदल दिया है। अंग्रेजों के दौर की इस पुरानी प्रणाली को हटाकर हाल ही में आधुनिक ट्रैक सिस्टम लगाया गया है, जिससे अब ट्रेनों की रफ्तार में इजाफा होगा और यात्रियों को समय की बचत के साथ बेहतर सुविधा मिलेगी।
जानकारी के अनुसार ए केबिन के पास स्थित यह डायमंड क्रॉसिंग लंबे समय से तकनीकी समस्याओं का कारण बनी हुई थी। पुराने सिस्टम के उपकरण न केवल जटिल थे, बल्कि इनके पाट्र्स भी आसानी से उपलब्ध नहीं होते थे। इसके चलते मेंटेनेंस में देरी होती थी और हर माह सुधार कार्य के कारण ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ट्रेनों की गति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पहले जहां इस सेक्शन पर ट्रेनें करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरती थीं, वहीं अब यह गति बढकऱ 20 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई है। खास बात यह है कि कर्व (घुमावदार ट्रैक) पर भी अब ट्रेनें अधिक सहज और तेज गति से गुजर सकेंगी। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए रेलवे को लगभग चार महीने का समय लगा। आवश्यक पाट्र्स लुधियाना और ग्वालियर से मंगवाए गए, जिसके बाद तकनीकी टीम ने पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।

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60 किलो प्रति मीटर की मजबूत रेल

क्रॉसिंग बदलने के साथ ही इस हिस्से में नई पटरियां भी बिछाई गई हैं। पहले यहां 52 किलो प्रति मीटर की रेल लाइन थी, जिसे अब 60 किलो प्रति मीटर की मजबूत रेल लाइन से बदल दिया गया है। इससे ट्रैक की लोड क्षमता बढ़ी है और भारी ट्रेनों का संचालन भी अधिक सुरक्षित और सुचारू हो सकेगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पुरानी डायमंड क्रॉसिंग सिस्टम के कारण ट्रेनों को कॉशन पर यानी धीमी गति से निकालना पड़ता था, जिससे समय की बर्बादी होती थी। नई तकनीक से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो गई है और ट्रेनों का संचालन अधिक प्रभावी हो गया है।

ये है डायमंड क्रॉसिंग

रेलवे में जब एक अप और डाउन ट्रैक किसी दूसरे अप-डाउन ट्रैक को एक ही स्थान पर क्रॉस करते हैं, तो वहां प्लस (+) जैसा चिन्ह बनता है, जिसे डायमंड क्रॉसिंग कहा जाता है। यह व्यवस्था से कार्य तो चल रहा था लेकिन इसमें ट्रेनों की गति सीमित रखनी पड़ती है और रखरखाव भी जटिल होता है। रेलवे अब इस तरह की पुरानी क्रॉसिंग को धीरे-धीरे खत्म कर आधुनिक तकनीक अपना रहा है, ताकि ट्रेनों की गति बढ़ाई जा सके और संचालन में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सके।

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Published on:
22 Apr 2026 08:30 pm
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