पोस्टमार्टम हाउस के पास खून से सने कपड़े, सिरिंज और संक्रमित सामग्री का ढेर, नियमों की अनदेखी से स्वास्थ्य व पर्यावरण पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
कटनी. जिला अस्पताल परिसर में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। पिछले कई महीनों से अस्पताल से निकलने वाला खतरनाक जैव-चिकित्सीय कचरा पोस्टमार्टम हाउस के समीप खुले स्थान पर फेंका जा रहा है। इस कचरे में खून से सने कपड़े, इस्तेमाल की गई सिरिंज, संक्रमित दस्ताने, ग्लूकोज की बोतलें, पाइपलाइन, सैनिटरी पैड और अन्य मेडिकल अपशिष्ट शामिल हैं, जो न केवल अस्पताल परिसर की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। सोमवार को भी कर्मचारी द्वारा खुले में मेडिकल वेस्ट सामग्री फेंकी गई, जिसे दृश्य को पत्रिका टीम ने अपने कैमरे में कैद किया है।
नियमों के अनुसार इस प्रकार के जैव-चिकित्सीय कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाना अनिवार्य होता है, लेकिन जिला अस्पताल में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। पोस्टमार्टम हाउस के पास खुले में पड़े इस मेडिकल वेस्ट से तेज दुर्गंध फैल रही है और आसपास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है।
स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब इस मेडिकल वेस्ट को अलग से सुरक्षित तरीके से नष्ट कराने के बजाय सीधे सामान्य कचरे में मिलाकर भेजा जा रहा है। नगर निगम द्वारा अनुबंधित कचरा प्रसंस्करण कंपनी एमएसडब्ल्यू के वाहनों में इस खतरनाक कचरे को भरकर ले जाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल प्रबंधन ने मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए जबलपुर की एक अधिकृत कंपनी से अनुबंध कर रखा है और इसके लिए हर माह लाखों रुपये का भुगतान भी किया जाता है। इसके बावजूद यदि मेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण नहीं हो रहा है, तो यह अस्पताल प्रबंधन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
खुले में पड़े मेडिकल वेस्ट से कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इस्तेमाल की गई सिरिंज, खून से सना कपड़ा और अन्य संक्रमित सामग्री हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, एचआईवी, टेटनस और अन्य संक्रामक रोगों के प्रसार का कारण बन सकते हैं। अस्पताल परिसर में आने-जाने वाले मरीज, उनके परिजन, सफाईकर्मी और आसपास रहने वाले लोग इस कचरे के संपर्क में आकर संक्रमित हो सकते हैं। इसके अलावा आवारा पशु और कुत्ते भी इस कचरे को इधर-उधर फैलाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
मेडिकल वेस्ट का खुले में पड़ा रहना पर्यावरण के लिए भी बेहद खतरनाक है। वर्षा के दौरान यह कचरा मिट्टी और जल स्रोतों में मिल सकता है, जिससे भूजल और आसपास के पर्यावरण के प्रदूषित होने की आशंका रहती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर इसका असर पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के अनुसार अस्पतालों को मेडिकल कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में संग्रहित करना अनिवार्य होता है। इसके लिए पीले, लाल, नीले और सफेद रंग के विशेष कंटेनरों का उपयोग किया जाता है। इसके बाद अधिकृत एजेंसी के माध्यम से इस कचरे को इंसीनरेटर या अन्य वैज्ञानिक विधि से नष्ट किया जाता है। इन नियमों के तहत मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंकना या सामान्य कचरे में मिलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसा करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए जुर्माना तथा कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी है।
स्थानीय लोगों और अस्पताल कर्मचारियों द्वारा इस गंभीर लापरवाही की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से भी इस मामले में गंभीर पहल नहीं दिखाई दे रही है। इंद्र मिश्रा द्वारा भी सीएमएचओ को समस्या बताई थी, लेकिन अबतक नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए हर माह भारी-भरकम राशि खर्च की जा रही है, तो फिर नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा है और इस लापरवाही के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराएंगे। लापरवाही पर कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही अस्पताल में मेडिकल वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा, ताकि आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण को इस गंभीर खतरे से बचाया जा सके।