कलेक्टर न्यायालय के आदेश के दो माह बाद भी एसडीएम व तहसीलदार नहीं कर सके कार्रवाई, फाइलों में दफन किया प्रकरण, खिरहनी स्थित रपटा नाला का मामला
कटनी. खिरहनी स्थित रपटा नाला में बिल्डर प्रवीण बजाज पप्पू द्वारा किए गए अवैध निर्माण कर बाउंड्रीवाल बनाने के मामले में प्रशासन अबतक कार्रवाई नहीं कर सका है। कलेक्टर न्यायालय के आदेश के दो माह बाद भी एसडीएम, तहसीलदार सहित आला अधिकारी अबतक न तो अवैध निर्माण तोड़ा गया है और न ही शासकीय पानी मद की भूमि निजी भूस्वामी के नाम पर दर्ज होने की जांच पूरी हो सकी है। हैरानी की बात तो यह है कि प्रदेश के मुखिया खुद जल गंगा संवर्धन अभियान को लेकर हाल ही में हुई बैठक में जल संरचनाओं पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं, इसके बावजूद जिले में अधिकारी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार बिल्डर द्वारा खिरहनी में रपटा के समीप नाले पर अवैध निर्माण करते हुए बाउंड्रीवाल बना ली गई है। इस बाउंड्रीवाल की आड़ में रपटा नाला का गला घोंट दिया गया है। प्रकरण की जांच करते हुए तत्कालीन एसडीएम प्रदीप मिश्रा ने अवैध निर्माण को हटाने 16 अगस्त 2024 को आदेश जारी किया गया। आदेश जारी होने के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माण तोडऩे की कार्रवाई शुरू की लेकिन नाला में पानी अधिक होने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद बिल्डर द्वारा एसडीएम के आदेश के खिलाफ कलेक्टर न्यायालय में अपील की गई। कलेक्टर न्यायालय द्वारा प्रकरण की विवेचना में यह पाया गया कि अपीलार्थी द्वारा समक्ष अनुमति के बिना बाउंड्रीवाल का निर्माण किया गया, जिससे नाले के स्वरूप में परिवर्तन हुआ और बिना सक्षम अनुमति के निर्माण किया जाना अवैधानिक है और न्यायालय ने अपील निरस्त करते हुए एसडीएम के आदेश को स्थिर रखा। एसडीएम को आदेश किया कि अवैध निर्माण को तत्काल हटाए जाने के निर्देश दिए थे।
कलेक्टर न्यायालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया था कि ख.न. 442 रकवा 0.36 एकड़ मिसल अभिलेख 1907-08 के अनुसार पानी मद में दर्ज है तथा कैफियत में नाला दर्ज है। वर्तमान में नाला चौड़ा है। शासकीय मद पानी-नाला से भूस्वामी में परिवर्तन के संबंध में खसरा कैफियत में न्यायालय के प्रकरण क्रमांक या आदेश का उल्लेख नहीं है। अत: शासकीय पानी मद की भूमि निजी भूस्वामी हक में कैसे दर्ज हुई, इस संबंध में एसडीएम विस्तृत जांच कर 15 दिवस में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें लेकिन अधिकारी दो माह बाद भी जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं कर सके हैं।
कलेक्टर न्यायालय के आदेश पर प्रकरण की जांच की जा रही है। तहसीलदार को अवैध निर्माण हटाने के लिए कहा गया है। जल्द ही प्रकरण में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रपटा नाला में किए गए अवैध निर्माण को अबतक क्यों नहीं हटाया गया है, इसके संबंध में संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई भी करेंगे।