कटनी

बड़वारा के 15 स्कूलों में 75 लाख का खेल! नियमों को ताक पर रखकर भोपाल के ठेकेदार को सौंपा मरम्मत का काम

बिना कोटेशन व टेंडर दिया गया काम, अधूरे काम के बावजूद भुगतान की तैयारी, बीइओ कार्यालय से चल रही प्रक्रिया, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

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Mar 20, 2026
representative picture (patrika)

बालमीक पांडेय @ कटनी. बड़वारा विकासखंड के 15 शासकीय स्कूलों में निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को लेकर गंभीर मनमानी सामने आई हैं। हाल के वर्षों में निर्मित स्कूल भवन जिनकी मियाद 20 वर्ष से अधिक है उनके लिए प्रत्येक स्कूल को 5-5 लाख रुपए की राशि मरम्मत, रंगरोगन और शेड निर्माण के लिए स्वीकृत की गई है, लेकिन इस राशि के उपयोग में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। हालांकि मरम्मत के लिए राशि मिलने से स्कूल प्रबंधन में खुशी है कि बच्चों की सुविधाओं में इजाफा होगा।
जानकारी के अनुसार बिना किसी टेंडर या कोटेशन प्रक्रिया के भोपाल के एक ठेकेदार को एक जनप्रतिनिधी के दबाव में सीधे काम सौंप दिया गया। ठेकेदार द्वारा आधा दर्जन से अधिक स्कूलों में कार्य शुरू तो किया गया, लेकिन अधिकांश जगह काम अधूरा ही पड़ा है। इसके बावजूद मार्च माह में बजट लैप्स होने से बचाने के नाम पर बिना पूर्ण कार्य के ही भुगतान की तैयारी की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्राचार्यों से उपयोगिता एवं पूर्णता प्रमाणपत्र मांगे जा रहे हैं, जबकि कार्य जमीनी स्तर पर अधूरे हैं। पूरा काम बड़वारा बीईओ कार्यालय के माध्यम से संचालित हो रहा है, जहां राशि भी सीधे भोपाल मुख्यालय में पहुंची और वहीं से मनमाने तरीके से खर्च की जा रही है। इस पूरे मामले में जिला मुख्यालय स्तर पर भी कोई निगरानी नहीं हो रही है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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इन स्कूलों के लिए आई है राशि

जानकारी के अनुसार बड़वारा विकासखंड के 15 स्कूलों के राशि आई है इनमें गुणाकलां, बिजौरी, निगहरा, राहनियां, खरहटा, पठरा, भजिया, बसाड़ी, गणेशपुर, भदौरा नंबर एक, लुहरवारा, विलायतकला, ठुठिया सलैया, नन्हवारा सेझा, मझगवां स्कूल शामिल है।

इस नियम का नहीं हुआ पालन

नियम के अनुसार यदि स्कूल में कोई भी काम एक लाख रुपए से अधिक के कराए जाने हैं तो इसमें दो से अधिक ठेकेदारों के कोटेशन लिए जाने थे। जो ठेकेदार सबसे कम दर पर काम करता, उसे काम दिया जाना था, लेकिन इन सभी 15 स्कूलों में भोपाल के एक ठेकेदार को ही काम दे दिया गया है। वहीं दूसरी ओर स्कूलों मे काम एसएमडीसी के माध्यम से होना चाहिए था, जिसका पालन नहीं हुआ।

विधायक निधी का दिया गया हवाला

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्कूलों में मरम्मत कार्य पहले विधायक निधि से कराया जाना बताया गया। बाद में जब कुछ स्कूलों में काम शुरू हो गया और उनसे उपयोगिता व पूर्णता प्रमाणपत्र मांगा जाने लगा ताकि भुगतान हो सके, तब जाकर रहस्य से पर्दा उठा कि यह काम तो विभाग से हो रहा है, जिसमें बीइओ सर्वेसर्वा हैं।

प्राचार्यों ने कही यह बात
केस 01

पठरा हाइ स्कूल के प्राचार्य योगेंद्र सिंह का कहना है कि स्कूल में मरम्मत के लिए राशि हमें नहीं मिली है। बीइओ कार्यालय से ठेकेदार को मिलनी है। स्कूल में टीनशेड, साइकिल स्टैंड बनवाया गया है। स्कूल के भवन में सामने पुताई कराई गई है। बाकी ज्यादा जानकारी नहीं है।

केस 02

खरेहटा हाइस्कूल के प्राचार्य निरंजन पाल का कहना है कि पांच लाख रुपए से स्कूल में भोपाल के ठेकेदार द्वारा काम कराया जा रहा है। पुताई व मरम्मत होना है। स्टैंड भी बनना है। आधा काम हुआ है। ठेकेदार को राशि बीइओ कार्यालय से मिलेगी।

खास-खास

- जबलपुर जिला के नाम से जारी हो गया था पत्र, एक दिन में कराया गया सुधार।
- प्राचार्यों को विधायक निधि बताकर रखा गया अंधेरे में, अब मांग रहे प्रमाणपत्र।
- 20 फरवरी को मिली है स्वीकृत, अब 12 दिन के अंद काम पूरा कराने की टेंशन।
- भोपाल मुख्यालय से भी बीइओ को किया गया है काम कराए जाने के लिए अधिकृत।
- मांग पत्र के आधा पर जारी की गई है मरम्मत के लिए लोक शिक्षण संचालनालय से राशि।
- किसी भी स्थिति में अग्रिम आहरण के लिए नहीं है अनुमति, 31 मार्च तक पूरा कराने का दिया है लक्ष्य।
- नियम विरुद्ध भुगतान होने की स्थिति में प्राचार्य और आहरण संवितरण अधिकारी को माना जाएगा उत्तरदायी।

वर्जन

विकासखंड के 15 स्कूलों में मरम्मत के लिए 5-5 लाख रुपए जारी हुई हैं। कुछ स्कूलों में काम शुरू हो गया है। जहां पर मरम्मत की आवश्यकता नहीं है वहां काम नहीं कराया जाएगा, शेष की राशि वापस करा दी जाएगी।

एसएम सिंह, बीइओ बड़वारा।

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