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बांस के जंगल से प्रकट हुईं थीं मां जालपा, ढाई सौ साल से बरस रही कृपा, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

जंगल में होती थी पूजा, अब 365 दिन लगता है भक्तों का तांता, आज से उमड़ेगी भीड़

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कटनी

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Balmeek Pandey

Mar 20, 2026

jalpa devi

jalpa mandir

कटनी. शक्ति की उपासना के महापर्व का आज से आगाज हो रहा है। नौ दिनों तक मां के भक्त विविध रूपों में अराधना करेंगे। चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा पर हम आपको शहर के प्रमुख शक्तिपीठ में विराजी ‘मां जालपा’ के बारे में बता रहे हैं, जिनकी कृपा ढाई सौ साल से अधिक से बरस रही है। लोगों की मान्यता के कि लगभग 260 साल से बारडोली की धरा में विराजी मां जालपा शहर को न सिर्फ हर बला से बचातीं हैं बल्कि भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करतीं हैं। शहर का यह प्रमुख शक्तिपीठ है। यहां पर साल के 365 दिन मेले सा माहौल रहता है। नवरात्र पर्व पर मां की निराली छटा देखते ही बनती है। शहर में स्थित मां जालपा मंदिर बहुत पुराना है। पुराने इस मंदिर का रहस्य भी अनूंठा है।
पांचवी पीढ़ी के मंदिर के पुजारी लालजी पंडा ने बताया कि जहां पर माता रानी विराजी हैं यहां घनघोर जंगल हुआ करता था। यहां पर बांस का जंगल की बहुतायत थी और उन्हीं बांस के जंगल के बीच में मां जालपा विराजतीं थीं। पंडा के पूर्वज को माता ने स्वप्न दिया, जिसके बाद माता बांस के जंगल से प्रकट हुईं और आज उनकी महिमा जिला ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में है।
पंडा ने सन 1766 में रीवा जिला निवासी बिहारीलाल को माता ने कटनी बुला लिया था। माता के आदेश का पालन करते हुए बिहारीलाल मां की सेवा में कटनी पहुंचे और बांस के जंगल में जाकर नित्य माता की सेवा करने लगा। धीरे-धीरे माता रानी की कृपा से शहर का कायाकल्प हुआ और माता की मढिय़ा के बाद भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। मंदिर में माता की अखंड ज्योत, जवारे, कलश आकर्षण का केंद्र होते हैं। मां ज्वाला के रूप वाली मां जालपा की प्रतिमा सिल के आकार की हैं। पंडा बिहारीलाल ने पूर्ण विधि-विधान से माता की प्राणप्रतिष्ठा कराई। कुछ वर्ष बाद मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और फिर मंदिर में मां जालपा के साथ मा काली, शारदा की प्रतिमाएं भी स्थापित कराई गईं। मंदिर के बगल में हनुमानजी और भैरव बाबा भी विराजित किए गए।

मां 64 योगनियों की हुई स्थापना

2012 मंदिर का विशेष जीर्णोद्धार कराया गया। मंदिर के गुंबज, गेट, परिसर को आकर्षक बनाया गया है। मंदिर परिसर में पट्टाभिरामाचार्य महाराज के सानिध्य में 64 योगनियों की स्थापना कराई गई। नवरात्र के अलावा साल भर यहां भक्तों की भीड़ लगती है। गर्भगृह सहित मंदिर विराजी मां जालपा और माता कालका, शारदा व जालपा की दिव्य छवि के दर्शन कर श्रद्धालुओं के जन्मजन्मांतर के पाप दूर कर रहे हैं। बिहारीलाल पंडा की पांचवी पीढ़ी की संतान लालजी पंडा व उनके पुत्र मातारानी की सेवा में लगे हुए हैं।