
Katni stamp duty irregularity: मध्यप्रदेश के कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के परिवार से जुड़ी यश लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड से करोड़ों रुपये की वसूली की जाएगी। ग्राम झिंझरी की जमीनों की रजिस्ट्रियों में कम स्टाम्प शुल्क जमा करने के मामले में कंपनी को बड़ा झटका लगा है। कलेक्टर ऑफ स्टाम्प न्यायालय ने चार विक्रय पत्रों में अनियमितता मानते हुए कंपनी और संबंधित विक्रेताओं से वसूली के आदेश जारी किए हैं।
कलेक्टर ऑफ स्टाम्प न्यायालय ने स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क का अंतर, नियमानुसार पेनल्टी और दस्तावेज निष्पादन की तारीख से 1 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज सहित वसूली के आदेश दिए हैं। कलेक्टर ऑफ स्टाम्प न्यायालय ने चार रजिस्ट्री प्रकरणों में कम मूल्यांकन मानते हुए कंपनी से 77 लाख 64 हजार 958 रुपए की मूल राशि वसूलने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही वर्ष 2018 में रजिस्ट्री की तारीख से भुगतान होने तक 1 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज और 1 प्रतिशत की दर से शास्ति (जुर्माना) भी देय होगी। सूत्रों के अनुसार यदि राशि का भुगतान जुलाई 2026 में किया जाता है तो कुल देय राशि करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपए तक पहुंच सकती है।
जानकारी के अनुसार मामला जिला मुख्यालय के ग्राम झिंझरी स्थित लगभग 1.26 हेक्टेयर भूमि की वर्ष 2018 और 2019 में हुई रजिस्ट्रियों से जुड़ा है। शिकायतकर्ता नाजिम खान ने भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 48-ख के तहत शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता हर्ष कपूर और संबंधित विक्रेताओं ने पुराने विक्रय पत्रों की तुलना में नई रजिस्ट्रियों में भूमि की चौहद्दी और वास्तविक स्थिति बदलकर दर्ज कराई, जिससे शासन को स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क में राजस्व हानि हुई।
न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार जिन जमीनों की पुरानी रजिस्ट्रियों में दक्षिण दिशा में मिर्जापुर रोड (पुराना एनएच-7) दर्ज था, उन्हीं भूखंडों की बाद की रजिस्ट्रियों में चौहद्दी बदलकर उन्हें मुख्य सडक़ से अंदर स्थित दर्शाया गया। कुछ दस्तावेजों में यह भी उल्लेख किया गया कि जमीन मुख्य सडक़ से लगभग आधा किलोमीटर दूर है, जबकि शिकायत और जांच के अनुसार भूमि मुख्य मार्ग से लगी हुई थी। इस बदलाव का सीधा असर स्टाम्प शुल्क पर पड़ा। मुख्य सडक़ से लगी जमीन का कलेक्टर गाइडलाइन मूल्य अधिक होता है, जबकि अंदरूनी भूमि का मूल्य कम निर्धारित होता है। न्यायालय ने माना कि इसी आधार पर संपत्ति का कम मूल्यांकन कराया गया और कम स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क जमा किया गया, जिससे शासन को राजस्व की हानि हुई। गोपनीय रूप से कराई गई जांच में आरोप सही पाए गए हैं।
न्यायालय ने मौजा झिंझरी के खसरा नंबर 292 से जुड़े पांच विक्रय पत्रों की जांच की। इनमें सुनील कुमार सहजवानी, जसवंत कुमार मोहनानी, नानकराम भोजवानी और अनिल टहलरमानी से संबंधित चार रजिस्ट्रियों में अनियमितता पाई गई। आदेश में कहा गया कि मुख्य मार्ग से लगी जमीन को दस्तावेजों में अंदरूनी भूमि दर्शाया गया। नानकराम भोजवानी के मामले में मौके पर मौजूद लगभग 3500 वर्गफीट के टिनशेड का उल्लेख भी नहीं किया गया। हालांकि विजय कुमार टहलरमानी से जुड़े प्रकरण में अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क देय नहीं माना गया।
यह पहला मौका नहीं है जब संजय पाठक के परिवार से जुड़े भूमि प्रकरण पर स्टाम्प विभाग ने कार्रवाई की हो। इससे पहले विधायक संजय पाठक की पत्नी निधि पाठक से जुड़े एक अन्य मामले में भी कलेक्टर ऑफ स्टाम्प अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क जमा कराने का आदेश पारित कर चुका है। जानकारी के अनुसार उस मामले में आदेशित राशि का भुगतान अभी तक लंबित है। न्यायालय के इस आदेश के बाद अब संबंधित पक्षों से राजस्व वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।