रेलवे हब में हजारों कर्मचारियों की दिनचर्या प्रभावित, 15 मई तक आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित, वैकल्पिक रास्तों से बढ़ी दूरी और समय
कटनी. रेलवे के बहुप्रतीक्षित ग्रेड सेपरेटर प्रोजेक्ट का काम अब अपने अहम चरण में पहुंच गया है। एनकेजे क्षेत्र में फ्लाईओवर पर स्टील गार्डर चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जिसके चलते जीआरपी चौकी से आरपीएफ थाना के बीच का मार्ग 15 मई तक पूरी तरह बंद कर दिया गया है। प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस दौरान यहां से किसी भी प्रकार का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, क्योंकि निर्माण कार्य में भारी मशीनरी और क्रेनों का उपयोग किया जा रहा है। इस मार्ग की विशेषता यह है कि इसका उपयोग सबसे अधिक रेलवे कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। एनकेजे कटनी का प्रमुख रेलवे हब माना जाता है, जहां दो दर्जन से अधिक रेलवे कार्यालय संचालित हैं। इन कार्यालयों में हजारों की संख्या में अधिकारी और कर्मचारी प्रतिदिन कार्यरत रहते हैं। ऐसे में मार्ग बंद होने का सीधा असर उनकी दिनचर्या पर पड़ा है। कई कर्मचारियों को समय पर ड्यूटी पहुंचने के लिए अब लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है बल्कि अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों के लिए भी यह स्थिति कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, छोटे व्यापारी और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोग अब वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेने को मजबूर हैं। हालांकि प्रशासन ने वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था का दावा किया है, लेकिन ये मार्ग अपेक्षाकृत लंबे और व्यस्त हैं, जिससे जाम और देरी की समस्या भी सामने आ रही है। गर्मी के इस मौसम में यह असुविधा और ज्यादा भारी पड़ रही है।
निर्माण एजेंसी के अनुसार फ्लाईओवर पर स्टील गार्डर चढ़ाने का कार्य अत्यंत तकनीकी और संवेदनशील है। इसके लिए हाई कैपेसिटी क्रेन, हाइड्रोलिक उपकरण और अन्य भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही पाइल फाउंडेशन, रेल वायडक्ट, कंपोजिट स्टील गर्डर, डेक स्लैब और ओपन वेब गर्डर से जुड़े अन्य कार्य भी समानांतर रूप से जारी हैं। यही कारण है कि सुरक्षा के लिहाज से मार्ग को पूरी तरह बंद करना आवश्यक समझा गया है।
करीब 1800 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहा यह ग्रेड सेपरेटर प्रोजेक्ट झलवारा-कटंगी से मझगवां तक लगभग 33.40 किलोमीटर लंबा है। इसे दो हिस्सोंअप और डाउन ग्रेड सेपरेटर में विकसित किया जा रहा है। अप ग्रेड सेपरेटर का कार्य पूर्ण होकर चालू हो चुका है, जबकि डाउन लाइन पर तेजी से काम जारी है। इस परियोजना के तहत कुल 689 पियर्स पर पूरा ढांचा खड़ा किया जा रहा है, साथ ही 8 रेल ओवर रेल ब्रिज और 6 बड़े पुलों का निर्माण भी शामिल है।