राष्ट्रीय दलित महासभा के नेतृत्व में प्रदर्शन, डिप्टी कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, चेतावनी देते हुए कहा कि हक नहीं मिला तो करेंगे उग्र आंदोलन, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनके घरौंदे हटाए तो करेंगे सामूहिक आत्महत्या, बाणसागर में लगा देंगे छलांग, विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के हैं पीडि़त
कटनी. विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के इटौरा-पिपरा से पहले विजयराघवगढ़ और फिर विजयराघवगढ़ से कटनी मुख्यालय तक लगभग 75 किलोमीटर तक चिलचिलाती धूप में लंबी दूरी पैदल तय कर लगभग एक हजार की संख्या में आदिवासी शुक्रवार दोपहर कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान आदिवासी समुदाय के लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर प्रदीप मिश्रा को सौंपा। कहा कि अपने हक के कई वर्षों से आवेदन-निवेदन कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। अब उनके पास आत्महत्या के सिवाय कोई उपाय नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि राजनीति लोग सिर्फ अपनी रोटियां सेंक रहे हैं, आदिवासियों के हक की कोई चिंता नहीं है।
यह प्रदर्शन राष्ट्रीय दलित महासभा के नेतृत्व में किया गया, जिसमें शामिल आदिवासियों ने जमकर आवाज बुलंद की। जयपाल सिंह, सखी बाई, प्रीति सिंह, अशोक सिंह, अभिषेक सिंह, सरोज बाई, दसई कोल, ज्ञानी कोल, विष्णु कोल, अनुसुईया कोल, किरण सिंह, छोटू सिंह ने बताया कि बाणसागर परियोजना लागू होने के बाद से उन्हें लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। परियोजना के चलते उन्हें तालाब किनारे की जमीन से विस्थापित कर दिया गया, लेकिन आज तक न तो उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा मिला और ना ही पुनर्वास के लिए सरकारी जमीन का पट्टा प्रदान किया गया।
ज्ञापन में चैना बाई, देवती बाई, ऊषा बाई, विजय सिंह, मुन्नी बाई, राज सिंह, आरती सिंह, शोभा सिंह, बलवीर सिंह आदि ने बताया गया कि बरही तहसील के ग्राम पिपरा में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार वर्षों से सरकारी जमीन पर झोपडिय़ां बनाकर रह रहे हैं। बावजूद इसके, समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी उन्हें हटाने के लिए दबाव बनाते हैं और परेशान करते हैं। आदिवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से इस जमीन पर निवास कर रहे हैं, फिर भी शासन-प्रशासन ने उनकी समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
प्रदर्शन के दौरान आदिवासी नेताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि उन्हें उनका हक मुआवजा और जमीन का मालिकाना अधिकार नहीं दिया गया, तो वे उग्र कदम उठाने को मजबूर होंगे। प्रदर्शन में शामिल छोटू सिंह ने कहा कि यदि प्रशासन उनकी झोपडिय़ों व घरौंदों को हटाता है, तो वे सामूहिक रूप से बाणसागर में कूदने जैसा कठोर कदम उठाने पर मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उन्हें क्षेत्र में खतरा बना हुआ है, हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं बताया। प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने ज्ञापन लेकर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन आदिवासी समुदाय अब भी अपनी मांगों को लेकर अडिग नजर आ रहा है।
जिस समय पर कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन चल रहा था उस दौरान बच्चों के स्कूल छूटने का समय था। प्रदर्शनकारियों के सडक़ में खड़े हो जाने के कारण काफी समय तक जाम लगा रहा। जाम में कई स्कूल बसों सहित दोनों ओर लंबा जाम लग गया था, जिसके चलते राहगीर खासे परेशान हुए। हैरानी की बात तो यह रही कि माधवनगर थाना व मुख्यालय की पुलिस प्रदर्शन के दौरान खड़ी रही, लेकिन जाम खुलवाने कोई जहमत नहीं हुई।