बारिश के सीजन में जिले में जल प्लावन जैसे हालात निर्मित होते हैं, लेकिन बारिश के कुछ माह बाद से ही शहर के लोग बूंद-बूंद के लिए तरसने लगते हैं। यहां तक की कई स्थानों पर संघर्ष की स्थिति निर्मित हो जाती है। प्रकृति प्रदत्त अनमोल वर्षा जल का संचय न होने से अरबों लीटर व्यर्थ बह जा रहा है। प्रकृति के खजाने को बर्बाद होने से कोई नहीं रोक रहा। वर्षा जल के संग्रहण याने की रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से ही कुएं, बाड़ी, तालाब, नादिया आदि जलमय रहेंगे। इसके बाद भी अमृत को लेकर जारी है ऐसी बेपरवाही...

कटनी. बारिश के पानी को सुरक्षित करने और इस्तेमाल करने के लिए सरकार की ओर से भवन और घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग बनाने के लिए तमाम आदेश पारित किए गए हैं। इसके अलावा नए भवन व मकानों के नक्शे में वॉटर हार्वेस्टिंग निर्माण के लिए अनुमति अनिवार्य कर दी गई है, लेकिन इसका पालन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी केवल कागजों में ही कर रहें हैं। बेपरवाही और भीषण गर्मी के चलते तेजी से नीचे जा रहें वॉटर लेबल अब डेंजर जोन के नजदीक पहुंच चुका है। भवन निर्माण की परमिशन देते वक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की शर्त रखी जाती है। इसके लिए नगर निगम में 15 हजार तक अमानत राशि जमा करवाई जाती है। इसके बाद अनुमति देते हैं। निर्माणकर्ता वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाता है तो वेरिफिकेशन बाद अमानत राशि वापस होती है, लेकिन यहां नगर में 98 प्रतिशत निजी भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा।
सवा लाख में एक सैकड़ा पर ही सिस्टम
शहर में भवन निर्माण के साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से बनवाए जाएं लेकिन कहीं भी नव निर्मित भवनों में यह सिस्टम लगाए जाने की बात तो कोसों दूर है। जानकारी के मुताबिक शहर भर में लगभग सवा लाख मकान बने हुए हैं लेकिन 113 से अधिक मकानों में यह सिस्टम नहीं है। ऊंगलियों में गिनने लायक मात्र 55 से 60 मकानों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बने हैं। योजना को लागू हुए 17 वर्ष से अधिक का समय गुजर गया लेकिन जिम्मेदारों द्वारा इस महत्वपूर्ण सिस्टम को लागू कराने के लिए सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है।
तेजी से गिर रहा है जलस्तर
बारिश के पानी को न सहेजने से शहर की स्थिति बिगड़ती जा रही है। 10 साल पहले जमीन में 100 फीट पर पर्याप्त पानी मिल जाता था। अब यह 200 से 250 फीट पर भी नहीं मिल रहा। पीएचइ के कार्यपालन यंत्री इएस बघेल का कहना है कि बारिश का पानी नीचे न जाने से जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है।
यह जमा हो रही राशि
नियम के अनुसार भवन अनुज्ञा लेने के पहले रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए 140 से 200 वर्गमीटर निर्माण के लिए 7 हजार, 200 से 300 वर्गमीटर के लिए 10 हजार, 300 से 400 वर्गमीटर के लिए 12 हजार, 400 वर्गमीटर से अधिक निर्माण पर 15 हजार रुपये की सुरक्षा निधि नगर निगम में जमा हो रही है। यह राशि सिस्टम बनाने के बाद वापसी का प्रावधान है, लेकिन एक के द्वारा भी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा।
खास-खास:
- 1 अप्रैल से अबतक 225 जारी हुई हैं भवन निर्माण की अनुज्ञा, एक ने भी नहीं किया रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का पालन।
- मप्र भूमि विकास नियम 1984 की धारा 78 के तहत 26 दिसंबर 2009 से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य।
नगर पालिक निगम में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का पालन न करने पर कठोर कानून न होने से नहीं हो पा रहो नियम का पालन।
- शहर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए लोगों को होना होगा आगे, आसपास के लोगों को भी करना होगा जागरुक।
- नगर निगम के यंत्रियों को करनी है रेन वाटर हावेस्टिंग सिस्टम की मॉनीटरिंग, फिर भी जारी है बेपरवाही।
इनका कहना है
भवन निर्माण के लिए अनुज्ञा देते समय निर्माणकर्ता से सुरक्षा निधि जमा कराई जा रही है, लेकिन लोक सिस्टम नहीं लगा रहे। इसके लिए यंत्रियों को मॉनीटरिंग की जिम्मेदार दी गई है, लेकिन नहीं कर रहे। इस पर नोटिस जारी किया जाएगा। लोगों को भी जागरुक करेंगे।
एचपी त्रिपाठी, भवन अनुज्ञा अधिकारी।