
National Teacher Award 2026: उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की एक शिक्षिका ने अपने पढ़ाने के अनोखे तरीके से पूरे राज्य का नाम रोशन किया है। चायल ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय रसूलाबाद कोइलहा में तैनात शालिनी कुशवाहा को आज 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के खास मौके पर 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026' से सम्मानित किया गया है। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रपति उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान सौंपा। इस साल देशभर से कुल 48 शिक्षकों को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है जिनमें उत्तर प्रदेश के 3 शिक्षक शामिल हैं। कौशांबी के अलावा गाजियाबाद से डॉ. रेणु त्रिपाठी, बलिया से इफ्तिखार खान और उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले (नैनीडांडा ब्लॉक) से गबर सिंह बिष्ट ने भी यह गौरव हासिल किया है।
मूल रूप से प्रयागराज के नैनी इलाके की रहने वाली शालिनी कुशवाहा साल 2015 से कोइलहा प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर काम कर रही हैं। वह बच्चों को पारंपरिक और उबाऊ तरीकों से पढ़ाने के बजाय खेल-खेल में और विभिन्न गतिविधियों के जरिए शिक्षा देती हैं। उनके इस अनूठे तरीके का ही कमाल है कि स्कूल में बच्चों के एडमिशन में भारी इजाफा हुआ है। साथ ही कक्षा में बच्चों की सीखने की क्षमता और उनकी रोजाना की उपस्थिति भी पहले से काफी बेहतर हो गई है।
मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, अपने चयन की प्रक्रिया के बारे में शालिनी बताती हैं कि तय समय-सीमा पूरी होने के बाद उन्होंने इस पुरस्कार के लिए आवेदन किया था। इसके बाद शिक्षा विभाग और केंद्रीय मूल्यांकन टीम ने उनके कार्यों का बारीकी से आकलन किया। उनकी शानदार रिपोर्ट के आधार पर ही उनका चयन 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026' के लिए हुआ। वर्तमान में शालिनी कुशवाहा चायल बीआरसी में एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) के अहम पद पर कार्यरत हैं। इस भूमिका में उनका मुख्य काम क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना, शिक्षकों की मदद करना और विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है।
अपनी इस बड़ी कामयाबी के बाद शालिनी कुशवाहा ने आम लोगों और अभिभावकों से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि अक्सर सरकारी स्कूलों की छवि को धूमिल किया जाता है, लेकिन सच यह है कि यहां के शिक्षक बेहद योग्य और होनहार होते हैं। वे कई कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं पास करके इस मुकाम तक पहुंचते हैं। इसलिए अभिभावकों को शिक्षकों पर पूरा विश्वास करना चाहिए और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें सरकारी स्कूलों में बेझिझक भेजना चाहिए। शालिनी की इस सफलता पर कौशांबी बेसिक शिक्षा विभाग ने भी उन्हें ढेरों बधाइयां दी हैं।