कवर्धा जिले के 158 शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला लटक रहे हैं
कवर्धा . जिले की स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि जिले के 158 शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला लटक रहे हैं। इसके चलते ही मामूली बीमारी के लिए भी मरीजों को शहर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है।
जिले के स्वास्थ्य कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से अधिकतर स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटक रहे हैं। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को केवल जिला मुख्यालय इलाज के लिए आना पड़ रहा है। शासन की कई योजना और सेवाएं गांव में थम सी गई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गांव में स्वास्थ्स सेवा उपलब्ध कराने नाकाम साबित हो चुके हैं। जिलेभर के 243 स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल पर है। इससे जिले के सभी 147 उपस्वास्थ्य केंद्र और 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ताला लटक चुका है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा मेडिकल ऑफिसर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संयोजकों के भरोसे चलता है, जो फिलहाल ठप हो चुका है।
गांव में स्वास्थ्य कर्मचारी ही गर्भवति महिलाओं की डिलवरी कराते हैं, लेकिन गांव में एक भी कर्मचारी नहीं होने के कारण महिलाओं को नियमित जांच के लिए भी जिला अस्पताल आना पड़ रहा है। इसी प्रकार गर्भवति महिलाओं को न तो उचित सलाह मिल पा रहा है। इसके कारण काफी परेशानी हो रही है। महिलाएं इलाज के लिए भटक रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्था करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। इसका सीधा असर संस्थागत प्रसव पर पड़ रहा है। महिलाओं को निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है जहां पर लूट मची है।
स्वास्थ्य कर्मचारियों के हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग व शासन द्वारा चलाएं जा रहे अभियान पर भी असर पड़ रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा बच्चों को स्वस्थ्य रखने के लिए रुबेल व खसरा का टीकारण अभियान चलाया जाना था, लेकिन हड़ताल के चलते अभियान के समय में बदलाव कर दिया गया है। इसी प्रकार मौसम के हिसाब से गांव में बीमारी के लिए शिविर व अन्य दवाईयों का वितरण किया जाता था, लेकिन कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते सारे अभियान बंद हो गए हैं।
कबीरधाम के सीएचएमओ डॉ. केके गजभिये ने कहा कि स्वास्थ्य संयोजकों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवा थोड़ी बाधित जरूरी हुई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व जिला अस्पताल में मरीजों का नियमित इलाज हो रहा है। हड़ताल खत्म होने के बाद भी कर्मचारी वापस लौटेंगे। इसके बाद भी काम सुचारु रुप से चलेगा। खसरा व रुबल टीकाकरण अभियान के समय में फिलहाल परिवर्तन किया गया है।
जिले में 176 स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसमें सभी 147 उपस्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत 243 स्वास्थ्यकर्मी बेमुद्दत हड़ताल पर हैं। वहीं ११ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य कर्मी भी हड़ताल पर है। 100 ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक पुरुष, 120 महिला, १६ स्वास्थ्य पर्यवेक्षक पुरुष व 13 स्वास्थ्य पर्यवेक्षक महिला कार्यरत हैं। इसमें केवल छह कर्मचारी ही सेवा दे रहे हैं, बाकी 243 हड़ताल पर हैं।
जिले के शासकीय अस्पतालों में विशेषज्ञ, मेडिकल ऑफिसर, नर्स, एएनएम और एमपीडब्ल्यू के 552 पद स्वीकृत हैं। लेकिन इसमें 179 पद आज भी रिक्त हैं। वहीं 373 डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी सेवा दे रहे हैं। विशेषज्ञ के 47 पदों में केवल ५ ही कार्यरत हैं। वहीं मेडिकल ऑफिसर के 60 में २१ पद खाली पड़े हैं। इसी तरह 60 नर्स, 29 एएनएम और 27 एमपीडब्ल्यू के पद खाली हैं।
स्वास्थ्य कर्मचारियों के हड़ताल का असर टीकाकरण पर भी पड़ रहा है। बच्चों को लगने वाला टीका समय पर नहीं लग पा रहा है। उपस्वास्थ्य केंद्रों में बच्चों को उनके उम्र के अनुसार कई प्रकार के टीका व पोलियो की दवा पिलाई जाती है। लेकिन हड़ताल के चलते बच्चों को टीका नहीं लग रहा है। वैसे भी कबीरधाम टीकाकरण के मामले में काफी पीछे हैं।