Kawardha News: शहर से गुजरने वाले रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे पर प्रस्तावित नए बायपास का अंतिम सर्वे पूरा हो चुका है और अब इसकी रिपोर्ट दिल्ली भेजी गई है, जहां जल्द ही अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
CG News: कवर्धा के जिला मुख्यालय से गुजरने वाले रायपुर-जबलपुर नेशनल हाइवे पर वर्षों से उठ रही बायपास की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम ने शहर में नए बायपास मार्ग के लिए अंतिम सर्वे पूरा कर लिया है और एक पुराने तथा दो नए प्रस्तावित मार्गों के विकल्प के साथ रिपोर्ट दिल्ली ले गई है।
शहर के बीच से गुजरने वाला यह हाइवे करीब 4 से 5 किलोमीटर तक शहरी सीमा के भीतर आता है जिससे यातायात का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी समस्या को देखते हुए लंबे समय से बायपास निर्माण की मांग की जा रही थी। रायपुर-जबलपुर नेशनल हाइवे का निर्माण लगभग 21-22 वर्ष पहले हुआ था।
उस समय शहर के बाहर पुल से होते हुए मिनीमाता चौक तक करीब एक किलोमीटर का बायपास बनाया गया था लेकिन बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव के सामने यह अब पूरी तरह अपर्याप्त साबित हो रहा है। शहर का दायरा तेजी से बढ़ा है और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई लोग इन हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं जिससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश और आंदोलन की स्थिति भी बन चुकी है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि शहर से पहले ही भारी वाहनों को डायवर्ट कर दिया जाए, ताकि उन्हें शहर में प्रवेश ही न करना पड़े। प्रस्तावित योजना के अनुसार बायपास शहर से करीब 7 किलोमीटर पहले शुरू होकर 7-8 किलोमीटर आगे निकल सकता है जिससे ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
कुछ समय पहले छिरहा तिराहे से जोराताल ढलान के पास बायपास के लिए सर्वे किया गया था लेकिन तकनीकी कारणों से उसे मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया था। हालांकि हाल के दिनों में बायपास की मांग फि र तेज हुई, जब प्रदेश के डिप्टी सीएम ने चिल्फी से सिमगा तक फोरलेन और कवर्धा शहर के बाहर बायपास निर्माण की जरूरत को दोहराया। इस पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी सहमति जताई, जिसके बाद मामला तेजी से आगे बढ़ा।
सूत्रों के अनुसार, एनएचएआई टीम ने कुल तीन विकल्पों पर सर्वे किया है। इसमें पहला विकल्प है पूर्व में किया गया सर्वे शहर से कुछ किलोमीटर आगे रायपुर रोड की ओर छिरहा तिराहे से जोराताल ढलान के पास बायपास जिस पर फिर से विचार किया जा सकता है।
दूसरा विकल्प रायपुर-जबलपुर मार्ग पर शहर से करीब 10 किमी पहले ग्राम बिरकोना से निकलकर जबलपुर रोड पर करीब 8 किमी दूर बिजई गांव के आसपास जोडऩे की योजना संभावित है। तीसरा विकल्प रायपुर रोड से करीब 4 किमी पहले ग्राम मगरदा से निकलकर जबलपुर रोड पर 6-7 किमी आगे ग्राम सिंघनपुरी के पास जोड़ने का प्रस्ताव। हालांकि इन रूटों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रशासन ने जानबूझकर इन जानकारियों को गोपनीय रखा है।
कवर्धा में बायपास निर्माण को लेकर स्थिति अब निर्णायक मोड़ पर है। तीन विकल्पों में से किसी एक पर जल्द अंतिम मुहर लग सकती है। इससे शहर को ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन और एनएचएआई ने अभी तक बायपास के अंतिम रूट का खुलासा नहीं किया है। योजना है कि पूरी प्रक्रिया पूरी होने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही इसे सार्वजनिक किया जाएगा।
बायपास की संभावित जानकारी सामने आते ही जमीन दलाल सक्रिय हो चुके हैं। वे किसानों से कम कीमत पर जमीन खरीदने की कोशिश करने लगे हैं। वह बाद में उसी जमीन को ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा कमाएंगे। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहां किसानों ने जल्दबाजी में अपनी जमीन बेच दी और बाद में जब उसी जमीन की कीमत कई गुना बढ़ गई तो उन्हें पछताना पड़ा।
किसान किसी भी तरह के लालच या दबाव में आकर अपनी जमीन औने-पौने दाम पर न बेचें। उन्हें थोड़ा इंतजार करना चाहिए, ताकि अधिग्रहण के समय उन्हें शासन द्वारा निर्धारित उचित मुआवजा सीधे उनके खाते में मिल सके। ऐसे में किसानों को सावधान रहने की आवश्यकता है।