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Road Accident: 2 महीने में 75 लोगों की मौत, इस जिले की सड़क बनी जानलेवा, राहगीर भी नहीं सुरक्षित

Road Accident: कोरबा जिले में सड़क दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं। इसमें राहगीर मारे जा रहे हैं। सबसे अधिक दुपहिया वाहन पर सवार यात्रियों की जान जा रही है। सड़क पर पैदल चलने वाले या सड़क किनारे खड़े मुसाफिर भी सुरक्षित नहीं है।

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हादसा (Photo Source- Patrika)

हादसा (Photo Source- Patrika)

Road Accident: कोरबा जिले में सड़क दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं। इसमें राहगीर मारे जा रहे हैं। सबसे अधिक दुपहिया वाहन पर सवार यात्रियों की जान जा रही है। सड़क पर पैदल चलने वाले या सड़क किनारे खड़े मुसाफिर भी सुरक्षित नहीं है। हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं हुई है, जिसमें सड़क किनारे खड़े या दुपहिया वाहन में सफर के दौरान यात्रियों की जान गई है। जनवरी-फरवरी में अलग-अलग स्थानों पर 157 दुर्घटनाएं हुई है। इसमें 119 यात्री घायल हुए हैं। 75 यात्रियों की मौत हुई है।

यह स्थिति तब है, जब सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए जिलास्तर पर गठित सडक़ सुरक्षा समिति हर माह बैठक कर रही है। दुर्घटना की रोकथाम के लिए चर्चा कर रही है। लेकिन समिति की बैठक में लिए जा रहे निर्णय पर निर्धारित अवधि में अमल नहीं होने से दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।

सुरक्षा समिति की बैठक पर हर माह पेश किए जाने वाले आंकड़ों से पता चला है कि जिले में होने वाली कुल दुर्घटना में दो तिहाई हादसे राष्ट्रीय और राजकीय राजमार्ग पर रहे हैं। इन मार्गों पर कई ऐसे प्वाइंट है, जिन्हें जिला प्रशासन की ओर से गठित समिति ने डेंटर प्वाइंट के तौर पर चिन्हित किया है। यहां सुधार कार्य करने का निर्णय लिया है। लेकिन अभी तक निर्णय का धरातल पर क्रियान्वयन नहीं दिखाई दे रहा है।

बेलगरी नाला पुल

निगर निगम क्षेत्र में स्थित बेलगरी नाला पुल संकरा है। मार्ग पर स्पष्ट संकेतक नहीं है। यहां स्पीड लिमिट बोर्ड, रम्बरलर स्ट्रप लगाने जाने की जरुरत है। आसपास की झाड़ियों की सफाई की जानी है। लेकिन अभी तक इसपर भी काम नहीं हुआ है।

चोटिया में घुमावदार मोड़, नहीं दिखते वाहन

अंबिकापुर- बिलासपुर राजमार्ग पर बांगो थाना क्षेत्र में ही चोटिया चौक है। यहां घुमावदार मोड़ है। इससे आने जाने वाली गाडिय़ां दूर से नजर नहीं आती हैं। यहां स्थित टोल प्लाजा, प्रतीक ढाबा और महामाया पेट्रोल पंप के पास स्थान बेहद खतरनाक है। सडक़ सुरक्षा समिति ने यहां रोड मार्किंग के अलावा अप्रोच बनाने का सुझाव दिया है। यह कार्य एनएचआई को करना है। लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है।

हाइवे पर कटघोरा क्षेत्र में तानाखार

राष्ट्रीय राजमार्ग पर कटघोरा थाना क्षेत्र में तानाखार का इलाका भी दुर्घटना के लिए खतरनाक है। यहां स्थित ग्रिन वेज ढाबा से लगी जमीन पर अतिक्रमण है। यात्री प्रतीक्षालय के पास ग्रामीण सडक़ सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ता है। यह हिस्सा घुमावदार है। यहां रोड स्ट्रड, ब्रेकर और यातायात संकेतक लगाने की आवश्यकता है। सडक़ पर लाइट की जरुरत है। लेकिन अभी तक यहां भी काम नहीं हुआ है।

केंदई मार्ग पर हसदेव पुल घाट है खतरनाक

बिलासपुर- अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बांगो थाना क्षेत्र में केंदई रोड मोड़, केेंदई घाट, केंदई मोड स्कूल के पास स्थित स्थान और हसदेव पुल घाट सबसे अधिक खतरनाक है। इसके पीछे का कारण यहां एस आकार का कर्व होना है, जिससे आने जाने वाली गाडिय़ां दूर से नजर नहीं आती हैं। यहां स्पीड लिमिट बोर्ड, रम्बरलर, क्रेश बेरियर पूरा घाट पर लगाए जाने की आवश्यकता है। लेकिन अभी तक अमल नहीं हुआ है।

मोरगा एलिफेंट पुल भी है डेंजर प्वाइंट

इस मार्ग पर मोरगा क्षेत्र में हाथियों की पासिग के लिए बनाया गया एलिफेंट पुल खतरनाक है। मोरगा के आगे एक घाट है, जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती है। यहां का आकार घुमावदार होने से गाडिय़ां दूर से नजर नहीं आती है। सुरक्षा समिति ने मोरगा एलिफेंट पुल के पास क्रैश बेरियर लगाने का सुझाव दिया है। यह काम भी एनएचआई को करना है। लेकिन अभी तक एनएचआई उदासीन बना हुआ है।

दीपका झाबर रोड सिरकी

दीपका- झाबर, सिरकी रोड पर कोयला परिवहन का अधिक दबाव है। यहां स्थित पीडब्ल्यूडी और एसईसीएल की ओर से बनाए गए सड़क की ऊंचाई में अंतर है। इसे बराबर करने की आवश्यकता है। रोड की मरम्मत, सोल्डर एरिया में मार्किंग, कोयला परिवहन करने वाली गाडिय़ों को व्यवस्थित करने की जरुरत है। यह कार्य एसईसीएल और लोक निर्माण विभाग को सौंपा गया है, लेकिन अभी तक दोनों ने काम नहीं किया है।