
Prostitution Case: कबीरधाम जिले के मुख्यालय कवर्धा में जिस तरह देह व्यापार की जड़ें फैल चुकी हैं वह अब महज कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं बल्कि सामाजिक आपातकाल बन चुका है। शहर के भीतर यह धंधा गलियों से निकलकर लॉज, होटल और रिहायशी मकानों तक पहुंच चुका है। आज कवर्धा की पहचान उद्योग, संस्कृति या विकास से कम और देह व्यापार की सुर्खियों से अधिक बन रही है। यह स्थिति शर्मनाक है।
कई प्रतिष्ठान अब ठहरने के लिए नहीं बल्कि घंटे के हिसाब से शरीर बेचने और खरीदने के लिए संचालित हो रहे हैं। यह एक खुला रहस्य है जिसे सब जानते हैं लेकिन जिसे रोकने में व्यवस्था नाकाम दिख रही है। शहर के बस स्टैण्ड, ठाकुरदेव चौक घोठिया मार्ग, साधना नगर, राजनांदगांव-रायपुर बायपास, लालपुर रोड और समनापुर रोड ये महज रास्ते नहीं बल्कि शहर के वे बिंदु बन चुके हैं जहां दिन भर लड़के-लड़कियों की संदिग्ध आवाजाही लगी रहती है।
इन इलाकों के कुछ लॉज अब ठहरने की जगह नहीं रहे, बल्कि देह व्यापार के अड्डे बन गए हैं। कई लॉज में पहचान पत्र केवल लड़कों का लिया जाता है। लड़कियों नहीं। सिर्फ पैसे लिए जाते हैं। 500 रुपए प्रति घंटे से शुरू होने वाले कमरे इस बात का सबूत हैं कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं बल्कि संगठित, व्यावसायिक और निर्लज्ज धंधा है। ऐसे लॉज के काउंटर पर नैतिकता नहीं, कैश चलता है कानून नहीं, दलालों का राज है।
बीते माह से पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की जो बताती है कि समस्या कितनी गहरी है। 7 जनवरी की रात घुघरी रोड टर्मिनल के बाजू में पुलिस ने एक मकान पर छापा मारकर एक दलाल और तीन युवतियों को हिरासत में लिया। आरोप देह व्यापार, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्य संचालिका महिला गिरफ्तार क्यों नहीं हुई।
14 जनवरी तुलसी पारा में शिकायत के बाद तलाशी हुई। मौके पर कोई संदिग्ध नहीं मिला, लेकिन कड़ी पूछताछ में महिला सरस्वती साहू ने कबूल किया कि वह पैसे लेकर कमरे देती थी और लड़कियां भी उपलब्ध कराती थी। यानी अपराध स्वीकार है पर नेटवर्क कितना बड़ा है यह अभी भी पर्दे में है। क्योंकि इसमें कई लोगों के शामिल होने की आशंका है।
मजगांव क्षेत्र जहां मकान मालिक अमिताभ नामदेव को गिरफ्तार किया गया जो घंटे के हिसाब से कमरे किराए पर देता था। बड़ी संख्या में बने कमरे इस बात का प्रमाण हैं कि यह आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि योजनाबद्ध धंधा था। इसके पहले साधना नगर और राजनांदगांव-रायपुर बायपास पर भी इसी तरह के मामले सामने आ चुके हैं।
शहर के कई लॉज ऐसे हैं जो सिर्फ नाम के लिए हैं। यहां न पर्यटक ठहरते हैं, न व्यापारी रुकते हैं बल्कि दिनभर संदिग्ध कपल आते-जाते रहते हैं। कई लॉज में लड़कियों का पहचान पत्र नहीं मांगा जाता। एंट्री-रजिस्टर में अधूरी जानकारी लिखी जाती है। कमरे घंटे के हिसाब से मिलते हैं और बाहर फैमिली लॉज का बोर्ड लगा रहता है। यह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि शहर की छवि पर काला धब्बा है।
पुलिस छापे मारती है गिरफ्तारियां होती हैं खबरें छपती हैं फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। कुछ दिन शांति, फिर वही धंधा। यह पैटर्न बताता है कि समस्या सिर्फ सड़क स्तर की नहीं, बल्कि संरक्षण, मिलीभगत और ढीली निगरानी तक जाती है।
कवर्धा पुलिस अनुविभागीय अधिकारी कृष्णा चंद्राकर का कहना है देह व्यापार मामले में लगातार कार्रवाई की जा रही है। बीते माह से अभी तक तीन प्रकरण में कार्रवाई की जा चुकी है। शहर में इस तरह का अवैध व अनैतिक कार्य नहीं चलने देंगे। जहां भी इस प्रकार की सूचना मिलती है तुरंत कार्रवाई की जाती है।