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Mahashivratri 2026: त्रेतायुग की गूंज! दशरथ तालाब में आज भी मौजूद हैं नौ कुंड और गुप्त सुरंग, नीम के दो पेड़ों को मानते हैं नाग-नागिन

Mahashivratri 2026: दशरंगपुर में दशरथ तालाब मौजूद हैं। वहीं पर राजा दशरथ, महारानी कौशिल्या, राम, लक्ष्मण, सीता और भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्तियां हैं।

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Feb 15, 2026
दशरंगपुर बना श्रद्धा का केंद्र (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Mahashivratri 2026: दशरंगपुर में दशरथ तालाब मौजूद हैं। वहीं पर राजा दशरथ, महारानी कौशिल्या, राम, लक्ष्मण, सीता और भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्तियां हैं। महाशिवरात्रि का मेला लगभग 70 साल पहले आरंभ हुआ, जो आज भी जारी है। ग्राम दशरंगपुर गांव से लगा दशरथ तालाब चारों ओर पानी से घिरे बीचों-बीच भव्य मंदिर है। उस मंदिर में भव्य शिवलिंग और प्राचीन काल के तीन मूर्तियां आज भी है।

उम्रदराज ग्रामीणों के अनुसार उनके पूर्वज बताते थे कि तालाब के नीचे नौ कुंड आज भी विद्यमान हैं। यह कुंड भी नहीं सूखते। इस कुंड को लोग त्रेतायुग से जुड़े मानते हैं। साथ ही यह भी बताया जाता है कि इस तालाब के एक किनारे से एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक गुप्त सुरंग है जो गांव के बाहर सतबहनियां बावली में निकलता है। वर्षों पहले तालाब सौंदर्यीकरण और गहरीकरण के दौरान गुप्त सुरंग में लगे पत्थरों और जंजीर मिला, जिसे सहेज कर रखा है।

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मंदिर पुजारी ने बताया कि जिस जगह आज मंदिर है और प्राचीन तीनों मूर्तियां हैं वहां कभी विरान घने जंगल वन पेड़ पौधे उगे हल्की उभार और डबरीनुमा था। उसी स्थान पर प्राचीन तीनों मूर्तियां राजा दशरथ कौशिल्या की मूर्ति, राम, लक्ष्मण, सीता और भगवान विष्णु की प्रतिमाएं निकली, जो स्वयं प्रकट हुई थी। मेला स्थल पर आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में जुटेंगे।

सतबहनियां में चढ़ाते हैं काला रेशम व चूड़ी

जय राजा दशरथ धाम ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष विजय चंद्रकर बताते हैं कि महाशिवरात्रि पर्व पर दूर दराज के लोग प्राचीन मूर्तियां को दर्शन करने आते हैं। गांव में कोई दूधमुंहे बच्चा रोने बिलखने लगते हैं तो सतबहनियां में माता श्रृंगार समान चूड़ी काला रेशमी चढ़ाने पर इस तरह के रोग निदान हो जाता है। अक्सर ग्रामीण यह तरह की समस्या के निदान के लिए सतबहनियां पहुंचते हैं।

नीम के दो पेड़ को मानते हैं नाग-नागिन

इस मंदिर में जहां तीनों मूर्तियां विराजमान हैं। उसी किनारे दो नीम का पेड़ है, जिसे ग्रामीण नाग नागिन की तरह मानते हैं। इस वृक्ष की खासियत है कि आज भी यह वैसे ही दिखाई देती है जैसा कि पहले उनके पूर्वज या बड़े बुजुर्ग के जमाने में थे। पेड़ का आकार बड़ रहा है न ही सिमट रहा। इसे लोग नाग नागिन पेड़ के नाम से पुकारते हैं। महाशिवरात्रि पर अक्सर नाग की दर्शन होती है। इसलिए ही श्रद्धालु इस पेड़ के दर्शन के लिए भी पहुंचते हैं।

Published on:
15 Feb 2026 05:57 pm
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