डेढ़ दशक में नहीं रोक सके माओवादियों के बढ़ते कदम, कहीं अगला बस्तर न बन जाए जिला
कवर्धा . आखिरकार कबीरधाम माओवादियों का गढ़ बन ही गया। डेढ़ से दो दशक में भी शासन और पुलिस, माओवादियों के बढ़ते कदम को नहीं रोक सके। यह राज्य सरकार की बहुत बड़ी नाकामी है।
बस्तर को माओवाद विरासत में मिला था, लेकिन कबीरधाम को नहीं। यहां तो माओवादियों ने अपने कदम एकदम धीरे-धीरे बढ़ाया। पुलिस को हमेशा ही खबर मिलती रही कि माओवादी गांवों से गुजर रहे हैं। रात रुकते हैं। ग्रामीणों की बैठक लेकर उन्हें शासन-प्रशासन के खिलाफ भडक़ाते रहे। बावजूद राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन उन्हें रोकने कभी कोई एक्शन नहीं लिया। पुलिस केवल जानकारी एकत्रित करने तक सीमित रहे। यहीं पर बहुत बड़ी चूक हुई, जिसके चलते ही माओवादी आज लोहारा, बोड़ला और कवर्धा मुख्यालय के आसपास तक पहुंच चुके हैं। अब तो डर है कि कहीं यह कबीरधाम अगला बस्तर का रूप न ले ले।
रहे सडक़ पर काम करने वाले मजदूरों को धमकी दी गई है कि वह देर शाम तक काम न करें। इससे ऐसा लगता है मानो यह माओवादी किसी घटना को अंजाम देने की फिराक में हो।