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तहसीलदार की भी नहीं सुनते! कवर्धा के इन गांवों में चल रहा अवैध काम, परेशान सरपंच और पंचों ने दिया सामूहिक इस्तीफा

Kawardha News: कबीरधाम के ग्राम पंचायत रैतापारा के सरपंच और पंचों ने शासकीय भूमि से अतिक्रमण नहीं हटाए जाने के विरोध में सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है। इस फैसले से हड़कंप मच गया है..

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Kawardha News

कवर्धा में सरपंच और पंचों ने किया सामूहिक इस्तीफा देने का ऐलान ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh news: कबीरधाम जिले से एक प्रशासनिक विफलता को उजागर करने वाला मामला है। ग्राम पंचायत रैतापारा के सरपंच और पंचों द्वारा दिया गया यह सामूहिक इस्तीफा जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के असहाय होने की बड़ी कहानी बयां करता है। जिला कबीरधाम के जनपद पंचायत पंडरिया के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत रैतापारा में प्रशासनिक उदासीनता और भू-माफियाओं के बढ़ते हौसलों से तंग आकर सरपंच समेत पूरी पंचायत ने सामूहिक इस्तीफे का ऐलान कर दिया है।

Kawardha News: धड़ल्ले से हो रहे अवैध कब्जे

सरकारी जमीनों और स्कूल की भूमि पर धड़ल्ले से हो रहे अवैध कब्जों पर जब जिला प्रशासन ने आंखें मूंद लीं तो जनप्रतिनिधियों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कलेक्टर के नाम अपना सामूहिक इस्तीफा दिया है। यह कदम क्षेत्र में प्रशासनिक बेरुखी और सरकारी तंत्र की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण बनकर उभरा है।

कहा- सामूहिक इस्तीफा स्वीकार करें

प्रशासन के इस असहयोगात्मक रवैये और सरकारी संपत्तियों की रक्षा करने में अपनी असमर्थता को देखते हुए सरपंच शेषनारायण चंद्रवंशी, पंच अयोध्या चंद्रवंशी, सरोजनी, शकुन, शिवराम, चमेली, सीता सहित अन्य पंचों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पदों से सामूहिक इस्तीफा प्रस्तुत कर दिया है। जनप्रतिनिधियों ने दोटूक कहा है कि या तो प्रशासन उनका इस्तीफा स्वीकार करे या फिर तत्काल प्रभाव से गांव की जमीनों से अवैध अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई करे।

प्रशासन ने खींच लिए हाथ

Kawardha News: चौंकाने वाली बात यह है कि तहसीलदार द्वारा बेदखली का आदेश जारी होने के बावजूद जब वास्तविक रूप से अतिक्रमण हटाने की बारी आई तो प्रशासन ने अपने हाथ खींच लिए। पंचायत का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा मांगी गई पुलिस बल की मांग को ठुकरा दिया गया और तय तारीख पर फोर्स उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके चलते बेदखली की पूरी कार्रवाई ठप हो गई।

दो बड़े मामलों में नहीं हुई कार्रवाई

कलेक्टर को सौंपे गए पत्र के अनुसार रैतापारा में शासकीय भूमि पर लगातार अतिक्रमण की दो बड़ी घटनाएं सामने आईं, जिनमें पंचायत की शिकायत के बावजूद राजस्व और पुलिस विभाग मूकदर्शक बना रहा।

मामला 1 - खसरा नंबर 795/2।

इस सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर भवन निर्माण किया जा रहा था। ग्राम पंचायत ने 19 मई 2025 को ही तहसीलदार को लिखित सूचना दी थी, लेकिन राजस्व विभाग ने समय रहते कोई एक्शन नहीं लिया। नतीजा यह हुआ कि अतिक्रमणकारी ने बेखौफ होकर निर्माण कार्य पूरा कर लिया।

मामला 2 -खसरा नंबर 536, रकबा 3 एकड़

इस बहुमूल्य सरकारी जमीन पर इसी साल 16 फरवरी 2026 को अवैध कब्जा किया गया। पंचायत ने मुस्तैदी दिखाते हुए 18 फरवरी 2026 को कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और तहसीलदार को तत्काल आवेदन दिया। तहसीलदार के निर्देश पर पंचायत ने कब्जाधारी को तीन बार नोटिस जारी किया और आखिरकार 8 अप्रैल 2026 को बेदखली का आदेश भी पारित कर दिया गया।

सरकारी स्कूलों की जमीनों पर भी डाका

पंचायत प्रतिनिधियों ने पत्र में बेहद चिंताजनक खुलासा करते हुए बताया कि इन दोनों मामलों में कार्रवाई न होने से क्षेत्र के भू-माफि याओं के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि अब गांव की अन्य शासकीय भूमियों के साथ-साथ शासकीय विद्यालयों की जमीनों पर भी धड़ल्ले से अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। पंचायत द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बाद भी प्रशासनिक सहयोग शून्य रहा, जिससे पूरी पंचायत खुद को असहाय और लाचार महसूस कर रही है।