कवर्धा

Kawardha News: कारखाने से 37, बाजार में 70 रुपए! चीनी के दाम में आखिर किसकी हो रही बल्ले-बल्ले? जानें पूरा खेल

Sugar Market Price: कवर्धा में चीनी के दाम को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। सहकारी शक्कर कारखानों से करीब 37 रुपए प्रति किलो की दर से निकलने वाली चीनी बाजार में पहुंचते-पहुंचते 70 रुपए किलो तक बिक रही है।
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Aug 27, 2026
sugar prices hike
चीनी के दाम बदलाव ( Photo - Patrika )

Sugar Price Hike: बाजार में चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। स्थानीय बाजार में चीनी करीब 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। कबीरधाम जिले के सहकारी शक्कर कारखानों से 37 रुपए प्रति किलो की थोक दर से बिकने वाली चीनी बाजार पहुंचते-पहुंचते करीब दोगुने दाम पर इसी जिले के लोगों को मिल रही है। अधिक कीमत का लाभ न तो किसानों को मिल पा रहा है और न ही शासन को। केवल थोक विक्रेता इसका लाभ उठा रहे हैं।

बाजार में 70 रुपए किलो तक पहुंची चीनी

देश में भी अगस्त में चीनी की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। केंद्र सरकार के अनुसार, 20 जुलाई से 20 अगस्त के बीच चीनी की औसत खुदरा कीमत 48 रुपए से बढ़कर 55 रुपए प्रति किलो हो गई। वहीं, कई बाजारों में खुदरा कीमत 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। सरकार ने उत्पादन में कमी, त्योहारी मांग, मौसम से फसल को नुकसान और जमाखोरी-सट्टेबाजी को कीमत बढ़ने के प्रमुख कारणों में माना है।

करीब दस साल पहले चीनी का भाव 32 रुपए किलो के आसपास था, क्योंकि सहकारी शक्कर कारखानों से थोक में इसकी बिक्री करीब 25 रुपए प्रति किलो होती थी। अब इसकी कीमत में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो चुकी है, लेकिन शक्कर कारखानों में इसकी कीमत में केवल 15 से 20 प्रतिशत ही बढ़ोतरी हुई है।

बाजार पहुंचते-पहुंचते 30 प्रतिशत तक वृद्धि

कबीरधाम में राम्हेपुर और पंडरिया में दो सहकारी शक्कर कारखाने हैं। केंद्र शासन द्वारा इस पर नियंत्रण है। राज्य सरकार चाहकर भी इसकी बिक्री तय नहीं कर सकती। केंद्र शासन की ओर से कारखानों में चीनी का कोटा निर्धारित होता है। चीनी की ऑनलाइन बोली लगती है और उसी के हिसाब से इसकी बिक्री होती है।

3500 से 3700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से निजी क्षेत्र में चीनी की बिक्री होती है, लेकिन बाजार पहुंचते-पहुंचते इसमें 30 प्रतिशत तक वृद्धि हो जाती है। आज की स्थिति में देखें तो चीनी 7000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी है, जबकि इसकी बिक्री अधिकतम 3700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से हुई है। मतलब इसमें 40 से 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा लाभ निजी कंपनियों को मिल रहा है, न कि सहकारी कारखानों और किसानों को।

यह है प्रमुख समस्या

कम दर और बोनस की कमी के कारण ही जिले में गन्ने का उत्पादन बढ़ने के बावजूद गन्ने का एक हिस्सा शक्कर कारखानों के बजाय गुड़ फैक्ट्रियों की ओर जा रहा है। गुड़ फैक्ट्रियों में गन्ने की खरीदी 400 रुपए प्रति क्विंटल की दर से होती है, वह भी नगद। जबकि सहकारी शक्कर कारखानों में छह से आठ महीने में पूर्ण भुगतान होता है। रिकवरी राशि एक साल बीतने के बाद मिलती है।

इससे किसान परेशान हैं, जिसका असर शक्कर कारखानों के पेराई सत्र पर पड़ रहा है। पहले कारखानों में अप्रैल-मई तक पेराई चलती थी, लेकिन अब पर्याप्त गन्ना उपलब्ध नहीं होने से कई बार पेराई सत्र फरवरी के आसपास ही सिमट जाता है।

खर्च और लाभ

गन्ना किसानों के उपलब्ध लागत आकलन के अनुसार, प्रति एकड़ कुल उत्पादन लागत करीब 65 हजार 600 रुपए बैठती है। इसमें मानव श्रम, बीज, खाद एवं उर्वरक, सिंचाई, मशीनरी, कीटनाशक और कार्यशील पूंजी पर ब्याज सहित अन्य खर्च शामिल हैं। औसत उपज करीब 250 क्विंटल प्रति एकड़ और 355 रुपए प्रति क्विंटल की दर से सकल आय लगभग 1.11 लाख रुपए बैठती है। इस हिसाब से शुद्ध लाभ करीब 35 हजार रुपए प्रति एकड़ होता है।

केंद्र सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए गन्ने का एफआरपी 355 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत, मजदूरी, खाद, सिंचाई और मशीनरी के खर्च को देखते हुए मौजूदा दर पर गन्ने की खेती से मिलने वाला शुद्ध मुनाफा धान जैसी फसलों की तुलना में कम है।

धान के मुकाबले गन्ना हार रहा

छत्तीसगढ़ में धान पर मिलने वाले समर्थन और प्रोत्साहन के कारण किसानों के लिए धान की खेती आर्थिक रूप से अधिक आकर्षक बनी हुई है। किसानों का कहना है कि जब तक गन्ने से मिलने वाली आय धान के आसपास नहीं पहुंचती, तब तक गन्ने का रकबा बढ़ाना मुश्किल होगा। यही कारण है कि किसान अब सरकार से गन्ने को भी कृषक उन्नति योजना के प्रोत्साहन से जोड़ने की मांग कर रहे हैं।

गन्ना और शक्कर कारखानों को बचाए रखने किसानों की प्रमुख मांग

  • 100 रुपए बोनस प्रति क्विंटल: गन्ने पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 100 रुपए प्रति क्विंटल की जाए।
  • 15 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन: गन्ना किसानों को कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपए का लाभ दिया जाए।
  • गन्ने का रकबा बचाने की नीति: धान की तरह गन्ने की खेती को भी आर्थिक रूप से आकर्षक बनाया जाए, ताकि किसान फसल बदलने के लिए मजबूर न हों।
  • कारखानों को पर्याप्त गन्ना: स्थानीय सहकारी शक्कर कारखानों को पूरे पेराई सत्र में पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए।

रकबा घटा तो शक्कर कारखानों पर भी संकट

गन्ने की खेती से किसानों का मोहभंग केवल खेत तक सीमित समस्या नहीं है। इसका सीधा असर जिले की दोनों सहकारी शक्कर फैक्ट्रियों पर पड़ सकता है। कबीरधाम जिले में 400 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गुड़ फैक्ट्रियों में गन्ने की खरीदी होती है, इसलिए स्थिति ठीक है। लेकिन राज्य के अन्य सहकारी शक्कर कारखानों की स्थिति ठीक नहीं है। बालोद और अंबिकापुर में गुड़ फैक्ट्रियों की कमी है, जिसके कारण वहां गन्ने का रकबा 40 प्रतिशत तक कम हो चुका है।

जबकि कबीरधाम जिले में रकबा कम नहीं हुआ है, लेकिन कारखानों में जाने वाला गन्ना गुड़ फैक्ट्रियों में पहुंच रहा है। इसका सीधा असर जिले के सहकारी शक्कर कारखानों पर पड़ रहा है।

बोनस भी हुआ कम

वर्ष 2019-20 में मिलने वाला प्रोत्साहन बोनस करीब 93.75 रुपए प्रति क्विंटल था, जो अब लगभग 25.95 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास रह गया है। डोमन चंद्रवंशी, अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, कवर्धा ने बताया कि पंजाब में गन्ने का मूल्य करीब 416 रुपए, हरियाणा में 415 रुपए, उत्तराखंड में 405 रुपए और उत्तर प्रदेश में 400 रुपए प्रति क्विंटल तक है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में 355 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर गन्ने की खेती को आकर्षक बनाए रखना चुनौती बन रहा है।

Updated on:
27 Aug 2026 11:23 am
Published on:
27 Aug 2026 11:23 am