
मानसून रूठा हुआ है और बार-बार किसान आसमान की ओर देख रहा है। प्रकृति की मार ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। दूसरी ओर किसानों को खेती और मौसम की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र भी कोई पहल नहीं कर रहा है। मौसम आधारित सलाह भी जारी नहीं हो रही है। जिसके चलते किसान पशोपेश में है कि कब फसल बोना है, कौन सा बीज लगाना है, किस तरह की खाद का उपयोग करना हैï?
कृषि विज्ञान केंद्र का मुख्य कार्य किसानों को समय-समय पर कृषि और मौसम की जानकारी देकर उनकी फसलों की उन्नति के लिए प्रयास करना है। मानसून सिर पर है और किसान बोवनी की तैयारी में लगा हुआ है। किसान को उचित सलाह देने अब तक कृषि विज्ञान केंद्र ने कोई एडवाइजरी जारी नहीं की है। उल्लेखनीय है कि खंडवा जिले में अधिकतर किसान मानसून आधारित खेती करते है। रबी की तुलना में खरीफ का रकबा करीब एक लाख हेक्टेयर से भी ज्यादा है। खरीफ में नियमित, अनियमित मानसून, मौसम बिगडऩे, बीजोपचार जैसी सलाह किसानों के लिए बहुत मायने रखती है।
कृषि विज्ञान केंद्र से खेती को लेकर कोई जानकारी नहीं दी जाती। पहले डामू (जिला कृषि मौसम इकाई) जानकारी देता था, लेकिन वह भी बंद हो गया है। हम व्यक्तिगत रूप से डामू के अधिकारी से जानकारी ले रहे हैं।
जितेंद्र शर्मा, किसान ग्राम गंभीर
खेती के लिए मौसम आधारित जानकारी बेहद जरूरती होती है। इसके आधार पर ही किसान फसल की देखरेख करता है। कृषि विज्ञान केंद्र से तो कभी भी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है।
नरेंद्र पटेल, संयुक्त कृषक संगठन प्रदेशाध्यक्ष
कुछ समय पहले तक खेती और मौसम की जानकारी डामू द्वारा दी जा रही थी, अब वहां से भी नहीं मिल रही है। कृषि विज्ञान केंद्र ने आज तक कोई सलाह या जानकारी किसानों को नहीं दी है।
भगवानदास पटेल, ग्राम धनगांव
कृषि विज्ञान केंद्र सिर्फ नाम का ही रह गया है। वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए आज तक कोई सलाह केवीके ने जारी नहीं की है। डामू से जानकारी मिल जाती थी, उसे दोबारा शुरू किया जाना चाहिए।
राजकुमार कैथवास, आम किसान यूनियन
जिले में खरीफ का रकबा 3.26 लाख हेक्टेयर का है। इसमें सबसे ज्यादा रकबा करीब दो लाख हेक्टेयर के लगभग सोयाबीन का है। मौसम को देखते हुए किसान अभी बोवनी से बच रहे है। हालांकि पानी की उपलब्धता वाले किसानों ने कपास की करीब 70 प्रतिशत लगभग 30 हजार हेक्टेयर में बोवनी कर दी है। किसान कपास में ड्रिप विधि का उपयोग कर रहे हैं।
पिछले साल प्री-मानसून में ही अच्छी बारिश हो चुकी थी। एक मई से 16 जून के बीच करीब साढ़े दस इंच यानि 465 मिमी बारिश हुई थी। पिछले साल की तुलना में इस साल प्री-मानसून में दो प्रतिशत बारिश भी नहीं हुई है। अब तक प्री-मानसून में महज 8.0 मिमी बारिश हुई है।
1.95 लाख सोयाबीन
65 हजार हेक्टेयर मक्का
49 हजार कपास
2 हजार हेक्टेयर धान
3 हजार हेक्टयर अरहर
12 हजार हेक्टेयर कोदो कुटकी, मूंग, उड़द
3.26 लाख हेक्टेयर कुल
नोट- कृषि कल्याण विभाग के अनुसार
केवीके जिला कृषि मौसम इकाई (डामू) प्रोजेक्ट के तहत पहले कृषि सलाह देता था। पिछले 31 मार्च से ये प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया है। किसान चाहे तो हमें फोन कर जानकारी ले सकते है। खरगोन से एएमएफयू (एग्रो मेट फिल्ड यूनिट) पांच जिलों के लिए सलाह जारी करता है।
डॉ. डीके वाणी, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक केवीके