खेत पहुंचे किसान ने जब वहां अपनी खड़ी फसल बर्बादी देखी तो वो इस नुकसान को बर्दाश्त नहीं कर सका और कीटनाशक पीकर आत्महत्या कर ली।
प्रकृति की मार के साथ साथ शासकीय लापरवाही ने मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में रहने वाले एक किसान की जान ले ली। खेत पहुंचे किसान ने जब वहां अपनी खड़ी फसल बर्बादी देखी तो वो इस नुकसान को बर्दाश्त नहीं कर सका और कीटनाशक दवा पी ली। घटना के बाद परिवार के लोग जबतक युवको को अस्पताल लेकर पहुंचे, तबतक काफी देर हो चुकी थी। इलाज शुरु होने से पहले ही युवक की मौत हो गई।
फसल बर्बाद होने के सदमें में आत्महत्या करने वाले सुखराम के परिजन ने बताया कि, डेढ़ महीने पहले ही गांव में बाढ़ आई थी, जिसकी चपेट में आए युवक के दो बेल पानी के बहाव में बह गए। इसके बाद पटवारी फाइल तो तत्काल बनाकर ले गया, लेकिन नुकसान पर मुआवजा अबतक नहीं मिल सका। ऐसे में पुराने नुकसान से उबरने के लिए नई फसल से उम्मीद लगाए बैठा था। लेकिन, पानी न गिरने के कारण वो भी सूख गई। बताया जा रहा है कि, सुखाराम बीते 4-5 दिनों से काफी तनाव में था।
पत्नी खेत में काम कर रही थी और पति ने पी लिया जहर
बता दें कि, सिस्टम की लापरवाही के कारण जान गवाने का ये मामला जिले के अंतर्गत आने वाली पुनासा तहसील के जलवा के पास देत गांव का है। यहां रहने वाला 24 वर्षीय किसान सुखराम पिता फत्तू पत्नी अवलासा के साथ खेत में गया था। पत्नी जब खेत में काम कर रही थी, इसी दौरान मौका पाकर सुखाराम ने जहर पी लिया। हालांकि, तबीयत बिगड़ने पर वो पास रहने वाले दोस्त के घर चला गया। यहां उसने अपने दोस्त को जहर पीने की बात बताई। जहर की बात सुनते ही दोस्त तुरंत ही उसे बाइक पर बैठाकर नजदीक के अस्पताल पहुंचा, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण यहां डॉक्टरों ने सुखराम को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां पहुंचने से पहले ही सुखराम की मौत हो गई। हालांकि, सुखराम के बयान दर्ज नहीं हो सके। फिलहाल, मामला सामने आने के बाद मूंदी पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
भाई ने बताई तनाव की वजह
वहीं, मृतक के भाई चंदू का कहना है कि, सुखराम हमारी और उसकी 6 एकड़ जमीन खुद जोतता था। करीब 4 लाख की फसल सूखने से वो काफी तनाव में था। मृतक के परिवार में पत्नी और डेढ़ साल की एक बेटी है। चंदू ने ये भी बताया कि, सुखराम ने फसल लगाने और जुताई के लिए कर्ज ले रखा था। खेत में कुआं और पास में नदी भी है, लेकिन बिजली का वोल्टेज न होने के कारण मोटर नहीं चल पाती, जिससे फसल को पानी नहीं मिल सका। भाई ने ये भी बताया कि, फसल खराब होने के बाद करीब चार दिन पहले ही सुखराम ने घर आकर कहा था कि, मेरा सब खत्म हो गया। बैल चले गए। फसल नष्ट हो गई। उसकी आंखों में आंसू थे। उसे काफी समझाने की कोशिश की बावजूद इसके वो किसी से कुछ बोले बिना ही घर से चला गया।