खंडवा

अरुण यादव के गढ़ में कमलनाथ समर्थकों ने फोड़े पटाखे, मिठाइयां बांटी

राजनीति...दस दिन में बड़ा बदलाव, निमाड़ के हाथ रीते, कमलनाथ-सिंधिया समर्थकों ने गांधी भवन में फोड़े पटाखे।

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Apr 27, 2018
Kamalnath supporters distributed boiled crackers, desserts

खंडवा. विधानसभा चुनाव-2018 और लोकसभा चुनाव-2019 की तैयारियों में जुटे राजनीतिक दल बड़े फेरबदल कर रहे हैं। दस दिन में पहले भाजपा और फिर कांग्रेस द्वारा प्रदेशाध्यक्ष बदल दिए गए हैं।

कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक गांधी भवन में जुटे। ढोल-ताशे बजे, आतिशबाजी हुई। नारेबाजी की गई। मिठाइयां बांटी गईं। जिलाध्यक्ष ओंकार पटेल, शहर अध्यक्ष इंदलसिंह पंवार नहीं थे। यहां परमजीतसिंह नारंग, डॉ. मुनीष मिश्रा, अशोक पटेल, कुंदन मालवीय, अर्ष पाठक, गुरमीतसिंह उबेजा, पूनम पटेल, अवधेश सिसौदिया, सलीम पटेल, शांतनु दीक्षित, बलराम वर्मा, राहुल मेहता, आसिम पटेल, मेहमूद खान जुटे। अरुण यादव के समय में निष्कासित हो चुके राजनारायणसिंह पुरनी, जतिन पटेल व अन्य भी गांधी भवन आए।

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निमाड़ का कद घटा
दोनों पार्टियों द्वारा प्रदेशाध्यक्ष बदले जाने से सबसे ज्यादा प्रभाव निमाड़ की राजनीति पर पड़ा है। निमाड़ का वजूद घटा है। भारतीय जनता पार्टी ने नंदकुमारसिंह चौहान की जगह जबलपुर से सांसद राकेश सिंह को पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष पद की कमान सौंपी तो अब कांग्रेस ने अरुण यादव के स्थान पर छिंदवाड़ा से सांसद कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया है। मप्र की राजनीति में दोनों ही बड़ी पार्टियों द्वारा किए गए इस फेरबदल ज्यादा प्रभाव निमाड़ पर इसलिए पड़ा है, क्योंकि नंदकुमारसिंह चौहान और अरुण यादव दोनों ही यहां से ताल्लुक रखते हैं। अब तक प्रदेश की राजनीति में दोनों ही पार्टियों के मुखिया निमाड़ से थे लेकिन परिवर्तन के इस दौर में निमाड़ के हाथ लगभग रीते से हो गए हैं। प्रदेश में अब निमाड़ को कमतर आंका जाएगा।

आप के प्रदेश संयोजक अब-भी निमाड़ से, बदले जा सकते हैं
आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल हैं। वे निमाड़ की राजनीति से ताल्लुकात रखते हैं। यहां से वे चुनाव भी लड़ चुके हैं। इससे पहले विस्थापन की लड़ाई उन्होंने नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले निमाड़ से ही लड़ी है। राजनीतिक हलकों में ये चर्चाएं चल रही हैं कि ये भी बदले जा सकते हैं।

नए समीकरण बनेंगे
- नंदकुमारसिंह चौहान के मांधाता से विधानसभा से चुनाव लडऩे की चर्चाएं चल रहीं हैं, हालांकि उनके पास लोस चुनाव लडऩे के अलावा बेटे हर्षवर्धन को प्रोजेक्ट करने का विकल्प है।
- अरुण यादव ने गुरुवार को पद से हटाए जाने के बाद कहा कि अब कोई चुनाव नहीं लडूंगा लेकिन बाद में बोले कि पार्टी जैसा आदेश करेगी वो करूंगा। वे अपने भाई सचिन यादव को आगे बढ़ा सकते हैं।
- टिकट के दावेदारों के समीकरण भी बदले हैं, बदलाव के पहले तक नंदकुमार और अरुण के खेमे के लोग खुश थे लेकिन नए समीकरण बनेंगे। कांग्रेस में कमलनाथ-ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक खुश हो गए हैं।
- मप्र कांग्रेस कमेटी की नियुक्तियों को भंग करने की बात तो सामने आ ही गई है। जिलास्तर पर भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जिलाध्यक्ष-शहर अध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं।

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Published on:
27 Apr 2018 12:00 pm
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