
करगिल युद्ध ऑपरेशन विजय को 27 साल पूरे हो रहे है। दो दशक पूर्व पैदा हुए अधिकतर युवाओं को ऑपरेशन विजय की जानकारी नहीं है, लेकिन सेना में जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आज भी करगिल विजय प्रेरणा बनी हुई है। देश के युद्ध इतिहास के सबसे कठिनतम युद्ध में से एक करगिल ऑपरेशन विजय की गाथा आज भी युवाओं में जोश भर देती है।
27 वर्ष पूर्व करगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के माध्यम से दुश्मन से अपनी चोटियों को वापस हासिल कर इतिहास रचा। हाल के वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त रणनीति और ऑपरेशन सिंदूर जैसी सैन्य कार्रवाई ने भी युवाओं में सेना के प्रति सम्मान और देशसेवा का जज़्बा और मजबूत किया है। सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे जय हिंद डिफेंस ग्रुप के युवाओं का कहना है कि इन अभियानों से उन्हें प्रेरणा मिलती है कि वे भी वर्दी पहनकर देश की रक्षा में अपना योगदान दें।
करगिल युद्ध में ऑपरेशन विजय की सफलता बताती है कि भारतीय सैनिक किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने भी देश की सुरक्षा के प्रति सेना का दृढ़ संकल्प दिखाया। मैं सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना और शहीदों के सपनों को आगे बढ़ाना चाहती हूं।
रितिका गांगुले, छात्रा
करगिल के वीरों का बलिदान हम युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि भारत अपनी सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करता। यही भावना मुझे सेना में शामिल होने के लिए लगातार मेहनत करने की प्रेरणा देती है।
सागर पटेल, छात्र
जब भी कारगिल के शहीदों की गाथा सुनता हूं तो गर्व महसूस होता है। ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों ने सेना की क्षमता और साहस को दुनिया के सामने रखा है। मेरा सपना है कि वर्दी पहनकर देश की सीमाओं की रक्षा करूंगी।
सलोनी योगी, छात्रा
देश की रक्षा से बड़ा कोई कर्तव्य नहीं है। करगिल विजय दिवस हमें वीर सैनिकों के त्याग की याद दिलाता है। ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन सिंदूर ने युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ाया है। मैं पूरी लगन से तैयारी कर रहा हूं ताकि भारतीय सेना का हिस्सा बन सकूं।
शिवकुमार कासडे, छात्र