
श्री दादाजी धाम में जोर शोर के साथ शुरू हुआ नए मंदिर निर्माण का काम एक बार फिर ठंडे बस्ते में चला गया है। गुरु पूर्णिमा के पूर्व भक्तों की सुविधा के लिए कार्य को रोका गया था, जिसे दोबारा अब तक शुरू नहीं कराया गया है। लगभग दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थिति पूर्ववत ही बनी हुई है। वहीं, मकराना मॉर्बल के लिए भी अब तक वेंडर तय नहीं हो पाया है।
श्री दादाजी धाम में 84 खंभों का मकराना डेढ़ नंबर मॉर्बल से मंदिर का निर्माण होना है। दादाजी मंदिर की नींव के लिए खुदाई का काम 24 जनवरी से आरंभ हुआ था। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने पूजा-अर्चना भी की थी। इसके बाद 16 अप्रैल से नींव भरने के लिए बकायदा पूजा पाठ की गई और दो माह बाद 16 जून से नींव भराई का काम आरंभ कराया गया। गुरु पूर्णिमा के पूर्व 20 जुलाई को काम रोका गया, जिसके बाद से अब तक नींव भराई का काम पूरा नहीं हो पाया है। जबकि अगस्त में फाउंडेशन का काम पूरा हो जाना था।
श्री दादाजी धाम में नए मंदिर के निर्माण में मकराना मॉर्बल का उपयोग किया जाएगा। पहले चरण में सांसद, कलेक्टर सहित मंदिर निर्माण समिति सदस्यों ने स्वयं मकराना जाकर मॉबर्ल वेंडरों से चर्चा की थी और पिलर के सैंपल लाने को कहा था। जुलाई में ही वेंडरों ने पिलर के सैंपल लाकर श्री दादाजी धाम भक्त निवास परिसर में खड़े कर दिए। इसके बाद समिति द्वारा अब तक किसी भी वेंडर से संपर्क नहीं किया गया है। जबकि वेंडरों ने उस समय 15 दिन के वेलिड रेट बताकर सैंपल दिए थे। दो माह बीत जाने के बाद भी वेंडर तय नहीं होने से मॉर्बल के रेट भी बढ़ सकते है, जिससे मंदिर की लागत बढ़ेगी।
प्रशासन ने मंदिर निर्माण के लिए 11 सदस्यीय एक समिति का निर्माण किया है। सांसद, कलेक्टर की सक्रियता के चलते मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हुआ और फाउंडेशन तक पहुंच गया। गुरु पूर्णिमा तक सभी सदस्य भी सक्रिय रहे, इसके बाद मानों इस कार्य में किसी की कोई रूचि ही नहीं दिख रही है। उल्लेखनीय है कि गुरु पूर्णिमा के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी यहां पहुंचे थे और मंदिर निर्माण कार्य की जानकारी ली थी। इसके बावजूद भी अब काम की गति थम गई है।
श्री दादाजी धाम में 1800 स्क्वेयर फीट में नए मंदिर का निर्माण होना है। इसके लिए मकाराना डेढ़ नंबर मॉर्बल करीब डेढ़ लाख घन फीट मॉर्बल की आवश्यकता है। इसके लिए मकराना में दो से तीन वेंडर तय किए जाने है, क्योंकि एक साथ इतना मॉर्बल एक ही वेंडर के पास उपलब्ध नहीं है। वेंडर भी धीरे-धीरे कर मॉर्बल सप्लाय करेंगे, इसमें वेंडर को ही नक्काशी भी करना है। मॉर्बल वेंडर तय करने में जितना समय लगेगा, उतना समय मंदिर निर्माण का भी बढ़ता जाएगा। उल्लेखनीय है कि श्री बड़े दादाजी महाराज की बरसी शताब्दी वर्ष 2030 से पहले इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंदिर निर्माण का काम धीमा जरूर हुआ है, इसका कारण बीच में कई पर्व आना रहा है। अब मंदिर निर्माण का काम जल्द शुरू कराया जाएगा। मंदिर को तय समय पर पूरा कराया जाएगा।
ज्ञानेश्वर पाटिल, सांसद