
Kishore Kumar Birthday Special: 'मैं गांगुली हाउस (Ganguli House)हूं। खंडवा के एमजी रोड बांबे बाजार में पुराने दिनों को याद करते उम्मीद में खड़ा हूं। मैंने किशोर दा का सफर देखा है। मेरी दरकतीं दीवारें आज भी किशोर दा की यादों से गूंज रही है। उनकी मौत के बाद मेरा रखवाला सिर्फ सीताराम ही रह गया है। किशोर दा के जाने के बाद अपनों ने कभी मेरी सुध नहीं ली। मेरी कहानी किशोर के जन्म के बाद ही शुरू हुई। 4 अगस्त 1929 को मेरी इन दीवारों के बीच कुंजलाल बाबू और गौरीदेवी गांगुली के आंचल में नन्हीं किलकारी गूंजी (Kisore Kumar Birthday Special) थी। दोनों ने नाम रखा 'आभाष गांगुली', जो बाद में किशोर कुमार बने। मेरे ही आंगन में उन्होंने गायकी के सुर सीखे थे। 1982 में किशोर यहां कार्यक्रम देने आए। तब ऐसी महफिल सजी कि मेरी जर्जर दीवारों में नई जान आ गई। सुरों के जादूगर की वो आवाज आज भी मुझमें गूंज रही है, लेकिन मैं जर्जर हो रहा हूं, मुझे कब संवारोगे? क्या मेरा अस्तित्व बच पाएगा?
आखिरी बार किशोर दा 30 सितंबर 1986 में आए। तब लगा मेरे दिन फिरने वाले हैं। किशोर कहते थे दूध जलेबी खाएंगे, खंडवा में बस जाएंगे। लेकिन 13 अक्टूबर की मनहूस शाम उनके निधन की खबर आई। 15 अक्टूबर उनका पार्थिव शरीर आया। रातभर उनके प्रशंसकों के साथ मैं भी आंसू बहाता रहा। उनके जाने के बाद अपनों ने कभी मुझे याद नहीं किया। मेरी तन्हाई का रखवाला सीताराम, 40 साल से मेरी सेवा कर रहा है।
आज किशोर दा की जयंती है। यह गौरव दिवस (Gaurav Diwas) है। किशोर दा के चाहने वाले आएंगे। 3 दिवसीय कार्यक्रम सोमवार को समाप्त होगा। सुबह किशोर दा की समाधि पर दूध-जलेबी का भोग लगेगा, गौरव यात्रा (Gaurav yatra on Kishore Kumar Birthday) निकलेगी। शाम 5 बजे गौरी कुंज सभागृह में संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम और रात 7.30 बजे सेे म्यूजिकल नाइट होगा। इसमें पार्श्व गायक जॉली मुखर्जी को किशोर गौरव सम्मान दिया जाएगा। फिर सब लौट जाएंगे, पर मेरा जीर्णोद्धार कब होगा?