खंडवा

MP News : जान पर खेलकर शिक्षा ले रहे नौनिहाल, इंदिरा सागर का बैक वॉटर बढ़ा, बिगड़े हालात, Video

MP News : इंदिरा सागर का बैक वॉटर बढ़ने से छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को ट्यूब पर बैठाकर घर वालों ने पहुंचाया स्कू। पहुंचाया स्कूल। बिना डूब में आए आमोदा बना हुआ है डूब प्रभावित क्षेत्र।

2 min read

MP News :मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के अंतर्गत आने वाले बांगरदा में इंदिरा सागर बांध की डूब में नहीं आने के बाद भी ग्राम आमोदा डूब प्रभावित हो रहा है। यहां इंदिरा सागर बांध का जलस्तर बढ़ने पर ग्राम बैक वॉटर से घिर जाता है, जिसके चलते इंदिरा सागर बांध के बैक वॉटर के पानी में ग्राम आमोदावासी जान जोखिम में डालकर निकल रहे है।

स्कूल के विद्यार्थियों, बीमारों समेत प्रसूताओं की परेशानी बारिश के दिनों में बढ़ जाती है। हलात ये भी हैं कि बारिश के दिनों में किसी बीमार या गर्भवती महिलाओं को खटिया की नाव बनाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। बुधवार को जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण अपने बच्चों की जान जोखिम में डालकर उन्हें ट्यूब की नाव पर बैठाकर स्कूल छोड़ने पहुंचे है। अब इस घटनाक्रम की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी हैं।

इस बार नाव तक नहीं मिली

मामले को लेकर ग्राम वासियों का कहना है कि हर साल तेज बारिश के कारण इंदिरा सागर बांध का लेवल 261 मीटर के आसपास पहुंचने पर उन्हें इसी तरह की समस्या से जूझना पड़ता है। शासन प्रशासन, एनएचडीसी द्वारा समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया जा रहा है। बांध का लेवल बढ़ने पर ग्रामीणों को जलाशय से पार करने के लिए नाव की सुविधा दी जाती है, लेकिन इस बार अभी तक नाव की सुविधा नहीं मिल पाने से ग्रामीण परेशान हो रहे हैं।

बुजुर्ग को ट्यूब पर लेटाकर ले गए थे अस्पताल

सोमवार को 70 वर्षीय बीमार को इलाज के लिए बांगरदा ले जाने परिजन ने जलाशय में ट्यूब के ऊपर खटिया डालकर बुजुर्ग को जलाशय पार करवाया था। वहीं, महिलाओं और बच्चों को भी जान जोखिम में डालकर गांव से बाहर जाना पड़ रहा है।

नाव भी नहीं मिली

ग्रामीणों ने बताया कि बांध का वॉटर लेवल कम होने पर ही राहत मिल सकेगी। तब तक ग्रामीणों को इसी तरह से परेशानी का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन कम से कम यहां नाव ही लगवा दे, ताकि अस्थाई तौर पर समस्या का हल हो सके।

ट्यूब पर बैठकर बच्चों को पार कराया पानी

उल्लेखनीय है यहां मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे थे और बुधवार से नाव चलाने की बात कही थी। लेकिन खबर लिखे जाने तक यहां नाव का कही कोई अता-पता नहीं है। इसे मद्देनजर रखते हुए ग्रामीणों ने एक बार फिर मजबूरन अपनी जान पर खेलते हुएगाड़ी के ट्यूब पर बैठाकर बच्चों को स्कूल पहुंचाने का काम किया।

Updated on:
28 Aug 2024 04:30 pm
Published on:
28 Aug 2024 04:29 pm
Also Read
View All

अगली खबर