
केंद्र सरकार ने यूपीआई से 2 हजार रुपए से अधिक के भुगतान पर एमडीआर शुल्क लगाने की तैयारी कर ली है। यह शुल्क आगामी 18 अक्टूबर से लागू किया जाएगा, लेकिन इसका असर अभी से दिखने लगा है। इसके विरोध में सभी व्यापारी संगठन एकजुट होते जा रहे है। चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा विरोध दर्ज कराने के बाद अब ज्वेलर्स डेवलपमेंट वेलफेयर एसोसिएशन मप्र भी विरोध में उतर आया है।
यूपीआई शुल्क को लेकर ज्वेलर्स डेवलपमेंट वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव संतोष सराफ ने कहा कि सोने-चांदी के दाम पहले ही काफी बढ़े हुए हैं। इसके अलावा ज्वेलरी कारोबारियों पर जीएसटी, हॉलमार्किंग शुल्क, बैंक चार्ज और अन्य खर्चों का भी बोझ है। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से व्यापारियों की लागत और बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि ज्वेलरी कारोबार में ज्यादातर लेन-देन बड़ी राशि के होते हैं। यदि 2000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाया जाता है तो इसका सीधा असर व्यापारियों और ग्राहकों पर पड़ेगा। व्यापारी यह शुल्क ग्राहक से वसूलते हैं तो आभूषणों की कीमत बढ़ जाएगी और ग्राहक पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा।
एसोसिएशन का कहना है कि सरकार ने डिजिटल भुगतान और यूपीआई को बढ़ावा दिया है। ऐसे में यूपीआई पर अतिरिक्त शुल्क लगाना छोटे और मध्यम ज्वेलर्स के लिए परेशानी बढ़ाने वाला कदम होगा। संतोष सराफ ने कहा कि संगठन डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं है, बल्कि व्यापारियों और ग्राहकों पर पडऩे वाले अतिरिक्त आर्थिक भार का विरोध कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रस्तावित शुल्क जल्द वापस नहीं लिया गया तो अपने व्यापारियों के साथ प्रत्येक जिले में आंदोलन करेगा।
ऑल इंडिया पेट्रालियम डीलर्स एसोसिएशन के आह्वान पर निमाड़ पेट्रोलियम डीलर्स एसो. ने भी यूपीआई शुल्क का विरोध दर्ज कराया है। एसो. ने इसके लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के नाम एक ज्ञापन भी कलेक्टर को सौंपा है। एसो. अध्यक्ष प्रकाश नरेड़ी ने बताया कि पेट्रोल पंपों पर बिक्री का 55 प्रतिशत भुगतान यूपीआई से होता है। लंबी दूरी तय करने वाले ट्रांसपोटर्स भी यूपीआई से ही भुगतान कर रहे है। सेवा शुल्क लगाए जाने से इसका सीधा असर पेट्रोल पंपों की बिक्री पर पड़ेगा। जिले में करीब 125 पेट्रोल पंप है, जिनकी बिक्री प्रभावित हो सकती है।