
कोलकाता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को सिलीगुड़ी में पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों के साथ बैठक में उनकी पृथक पहचान सहित अन्य मांगों के संविधान के दायरे में स्थाई राजनीतिक समाधान का आश्वासन दिया। गृह मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा कि शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
बैठक में पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र की आबादी से जुड़े सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। पृथक पहचान, स्थाई राजनीतिक समाधान और भारतीय संविधान के तहत मान्यता से संबंधित मांगें भी बैठक में उठाई गईं। गृह मंत्री ने इन मुद्दों का संविधान के दायरे में जल्द स्थाई राजनीतिक समाधान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने समुदाय की अन्य मांगों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिलाया और कहा कि केंद्र से पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराकर सभी लंबित मुद्दों के समाधान का प्रयास किया जाएगा।
दार्जिलिंग से भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, गोरखा नेताओं और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच हुई बैठक का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के स्थाई राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे की रूपरेखा तय करना था। अमित शाह के उत्तर बंगाल दौरे के तीसरे और अंतिम दिन दार्जिलिंग की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित सुकना के एक होटल में यह बैठक हुई।
बिष्ट ने बताया कि गृह मंत्रालय के तहत वार्ताकार पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। यह समिति समझौते के अंतिम मसौदे को तैयार करने का काम करेगी। गृह मंत्रालय ने भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह को अक्टूबर 2025 में इस मुद्दे पर सरकार का आधिकारिक वार्ताकार नियुक्त किया था।
उनकी भूमिका राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने और गोरखा समुदाय की लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान तलाशने पर केंद्रित है। बैठक में दार्जिलिंग से सांसद हर्षवर्धन सिंगला, राज्य के पहाड़ी मामलों के मंत्री बिशाल लामा, जीजेएम नेता बिमल गुरुंग, जीएनएलएफ नेता मान घीसिंग, विधायक भरत छेत्री, विधायक सोनम लामा, विधायक नोमन राई, सीपीआरएम नेता जेबी राई, गोरानिमो नेता दावा पाखरीन और सुमेती नेता बिकाश राई भी मौजूद थे।