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कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 12 हजार पुलिस कांस्टेबलों की मेरिट लिस्ट पर 30 सितंबर तक रोक

West Bengal Police Recruitment: कलकत्ता हाईकोर्ट ने 12 हजार पुलिस कांस्टेबलों की मेरिट लिस्ट पर 30 सितंबर तक रोक लगा दी है। भर्ती में अनियमितता और ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर याचिका दायर हुई थी।
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West Bengal Police Recruitment

प्रतीकात्मक तस्वीर

कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बुधवार को पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई 12 हजार पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती की मेरिट लिस्ट जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी। पश्चिम बंगाल में 12,000 पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती के लिए वर्ष 2024 में पिछली सरकार ने अधिसूचना जारी की थी। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

2025 में हुई थी लिखित परीक्षा

मामले में लंबी सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की एकल पीठ ने बुधवार को भर्ती की मेरिट लिस्ट प्रकाशित करने पर 30 सितंबर तक अंतरिम रोक लगा दी। इस भर्ती के लिए अधिसूचना 2024 में जारी की गई थी, जबकि लिखित परीक्षा 2025 में आयोजित हुई थी। वहीं, साक्षात्कार प्रक्रिया इसी साल फरवरी तक पूरी कर ली गई थी। उस समय राज्य में टीएमसी की सरकार थी। भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई शिकायतें सामने आने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा था।

दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया

बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सुदीप्त चक्रवर्ती ने दावा किया कि भर्ती प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने मेरिट लिस्ट जारी करने पर 30 सितंबर तक अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया। पुलिस कांस्टेबल भर्ती को लेकर कानूनी विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ही शुरू हो गया था। इस साल हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा और राज्य में भाजपा की सरकार बनी।

पहले भी कई विवाद सामने आए

कलकत्ता हाईकोर्ट ने इससे पहले भी पुलिस कांस्टेबल भर्ती के संबंध में नई भाजपा सरकार का पक्ष जानना चाहा था। अब मेरिट लिस्ट के प्रकाशन पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई राज्य सरकार इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है। पिछली टीएमसी सरकार के कार्यकाल में सरकारी भर्तियों को लेकर कई विवाद सामने आए थे। इनमें स्कूलों में नौकरी के बदले कथित नकदी लेन-देन से जुड़े मामले सबसे प्रमुख रहे हैं। मुख्यमंत्री अधिकारी ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से कहा था कि पिछली टीएमसी सरकार ने जिस-जिस क्षेत्र को संभाला, वहां उसे कथित तौर पर भारी अव्यवस्था और तबाही का सामना करना पड़ रहा है।

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