कोलकाता

दुर्गा पूजा में CPIM के किताबों के स्टॉल पर बवाल, हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- आखिर किताबें बेचने में क्या परेशानी है?

Calcutta High Court: दुर्गा पूजा में CPIM के किताबों के स्टॉल लगाने पर विवाद कोलकाता हाईकोर्ट पहुंच गया। अदालत ने सवाल उठाते हुए पुलिस से 15 अक्टूबर तक रिपोर्ट मांगी है।
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Oct 14, 2026
Durga Puja News
दुर्गा पूजा में CPIM के किताबों के स्टॉल लगाने को लेकर हुए विवाद पर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई। (फोटो सोर्स-@LiveLawIndia)

Calcutta High Court: दुर्गा पूजा में किताबों का स्टॉल लगाने को लेकर CPIM और हिंदू जागरण मंच के बीच विवाद सामने आया है। मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने सवाल किया कि आखिर किताबें बेचने में क्या परेशानी है? कोर्ट ने पुलिस से पूरे मामले की जानकारी मांगी है और 15 अक्टूबर तक रिपोर्ट देने को कहा है।

CPIM का कहना है कि पार्टी पिछले 40 से 45 साल से दुर्गा पूजा के दौरान किताबों के स्टॉल लगाती आ रही है। लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल के बनगांव और पानीहाटी में पार्टी कार्यालयों के बाहर स्टॉल लगाने को लेकर परेशानी हुई। पार्टी ने आरोप लगाया कि उसके कार्यकर्ताओं को स्टॉल लगाने से रोका गया।

40 साल से लगा रहे थे स्टॉल, इस बार क्यों हुआ विवाद?

CPIM के वकील शमीम अहमद ने अदालत को बताया कि पार्टी हर साल दुर्गा पूजा के दौरान किताबों के स्टॉल लगाती रही है। इस बार भी पार्टी ने स्टॉल लगाने की तैयारी की थी, लेकिन बनगांव में मामला बिगड़ गया।

पार्टी के मुताबिक, 6 अक्टूबर की सुबह करीब 6:30 बजे कार्यकर्ता स्टॉल लगाने के लिए ढांचा तैयार कर रहे थे। तभी हिंदू जागरण मंच से जुड़े कुछ लोगों ने उन्हें रोक दिया। CPIM ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और उन्हें स्टॉल नहीं लगाने देने की धमकी दी गई।

पार्टी का यह भी कहना है कि जिस जगह वह किताबों का स्टॉल लगाना चाहती थी, वहां हिंदू जागरण मंच ने अपना ढांचा खड़ा कर लिया। CPIM ने आरोप लगाया कि इस दौरान पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हालांकि, ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं।

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- किताबें बेचने में दिक्कत क्या है?

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि किताबों का स्टॉल लगाने में आखिर परेशानी क्या है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी दूसरे राजनीतिक दल की आवाज दबाना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि CPIM को स्टॉल लगाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) से अनुमति लेनी चाहिए थी। सरकार के मुताबिक, जिस जगह स्टॉल लगाया जाना था, वह विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है।

अदालत ने पुलिस से यह भी पूछा कि संबंधित जगहों पर कितने स्टॉल लगाए गए हैं या लगाने की तैयारी चल रही है। साथ ही यह जानकारी देने को कहा कि स्टॉल लगाने के लिए जरूरी अनुमति ली गई है या नहीं।

15 अक्टूबर को पुलिस देगी रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने पुलिस को 15 अक्टूबर को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट से पता चलेगा कि संबंधित जगहों पर कितने स्टॉल लगाए गए हैं और उनके लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट और अदालत की अगली सुनवाई पर निर्भर करेगी। फिलहाल, हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है।

Updated on:
14 Oct 2026 03:49 pm
Published on:
14 Oct 2026 03:49 pm
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