
Chief Election Commissioner:चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति की नियुक्ति प्रधानमंत्री करते हैं, उसका उनके लिए काम करना स्वाभाविक है।
अभिषेक बनर्जी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसले अपनी जानकारी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए थे।
अभिषेक बनर्जी ने CEC की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किया जाता है तो यह स्वाभाविक है कि वह प्रधानमंत्री के लिए काम करेगा। उनका यह बयान चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच आया है। TMC सांसद ने इससे पहले भी मौजूदा विवाद पर CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयोग के कामकाज की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवालों की जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। अदालत में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 से जुड़े मामलों पर सुनवाई चल रही है। इस कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर रखा गया है। 23 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ में इस मामले को पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के पास भेजने के सवाल पर अलग-अलग राय सामने आई।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, मतदाताओं से जुड़ी अपीलों तथा चुनावी डेटाबेस की निगरानी और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ मामलों में दोनों आयुक्तों ने फैसलों को लेकर जानकारी नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज किया है। आयोग ने कहा है कि उसके सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक, विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव, टिप्पणियां या आपत्तियां आना एक सामान्य संस्थागत प्रक्रिया है।
SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें मौजूद विसंगतियों को दूर करना है।
अभिषेक बनर्जी ने इसी विवाद के बीच CEC की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाकर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है।