Bastar Tourist Spot: बस्तर के अनछुए प्राकृतिक क्षेत्रों को अब पर्यटक करीब से देख सकेंगे। कोंडागांव वनमंडल ने ग्राम पुसपाल को पर्यटन नक्शे में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है।
Bastar Tourist Spot: वैसे तो बस्तर अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, और यही वजह है कि, हर साल देशी - विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में बस्तर की खूबसूरती निहारने को आते हैं। यह जरूर है कि, पिछले कुछ दशकों से नक्सलियों के आतंक के चलते कुछ इलाके पर्यटकों से अनटच रहे हैं। लेकिन केंद्र व राज्य सरकार की बेहतर रणनीति के चलते नक्सलियों ने अपनी रणनीतियों से समझौता करते हुए आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा से जुड़ते चले जा रहे हैं।
ऐसा ही एक इलाका जो अबतक पर्यटकों की नजर से ओझल रहा जो भले ही बस्तर जिले का हिस्सा हो,लेकिन वनमंडल कोण्डागांव के अंतर्गत शामिल हैं। जहाँ कोण्डागांव वन मंडल के द्वारा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ग्राम पुसपाल को पर्यटन मैप में शामिल रहा है। जिसका खाखा विभाग ने पहले ही खींच रखा है अब इसे अमलीजामा पहनाने की तैयारी चल रही हैं।
इलाके से नक्सलियों के खात्मे के साथ ही अब पर्यटन का एक नया सर्किट तैयार होता नजर आ रहा है। जो कोण्डागांव जिले के केशकाल टाटामारी से होते हुए चैतगृह भोगापाल, प्राचीन शिवलिग गोबरहीन, होते हुए के शाम को पुसपाल में सन सेट देखकर रात्रि विश्राम के बाद सुबह चित्रकोट के लिए जाया जा सकेगा।
एक ही जिले में पर्यटक सूर्योदय और सूर्यास्त का विहंगम दृश्य का आनंद उठा सकेंगे, जो अपने आप मे पर्यटकों को अनोखे प्रकार का अनुभव कराएगा। जो एक समय नक्सल गतिविधियों का गढ़ था।पर्यटन क्षेत्र के विकास के साथ यहां के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सकेगा। जिससे क्षेत्र के विकास के साथ लोगों की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी— चूड़ामणि सिंह, डीएफओ कोण्डागांव
कोण्डागांव जिले का उत्तर वन मंडल जहां टाटामारी ईको पर्यटन इलाके में लोग सनराइज का आनंद ले सकेंगे तो वही शाम होते ही दक्षिण वन मंडल के पुसपाल में सनसेट का विहंगम ²श्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगा।
जहां वन मंडल के द्वारा राङ्क्षफ्टग, कॉटेज, एडवेंचर के साथ ही बहुत कुछ लोगो को आकर्षित करने खाखा तैयार किया गया है। बताया जा रहा है कि, 70 फीसदी डेवलपमेंट कोंडागाँव जिले के नारायणपुर इलाके में होगा वही 30 फीसदी कार्य बस्तर जिले के अंतर्गत कोण्डागांव वनमण्डल में होगा।