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अब शादी में नहीं बजेगा DJ, नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

DJ Ban in Chhattisgarh wedding: कोंडागांव के हल्बा समाज ने पारंपरिक संस्कृति को बचाने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए शादी समारोहों में DJ बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।

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DJ Ban in wedding

DJ Ban in wedding(photo-patrika)

DJ Ban in wedding: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में हल्बा समाज ने अपनी पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक मर्यादा को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। समाज की समीक्षा बैठक में शादी समारोहों में डीजे बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया। समाज के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि आधुनिकता के नाम पर पारंपरिक रीति-रिवाजों को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा और सामाजिक नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य होगा। कोपरा स्थित सामाजिक भवन में आयोजित बैठक में कई गांवों के समाज प्रतिनिधि, युवक-युवतियां और वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए। बैठक में सामाजिक अनुशासन, परंपरा संरक्षण और नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने पर विशेष चर्चा की गई।

DJ Ban in wedding: कुछ गांवों में DJ बजने पर जताई नाराजगी

बैठक में बताया गया कि हाल के दिनों में कुछ गांवों में समाज के नियमों के खिलाफ शादी समारोहों में डीजे बजाया गया था। इसे लेकर समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने कड़ी नाराजगी जताई। समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि पहले भी इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन कुछ लोगों ने नियमों की अनदेखी की। इसके बाद संबंधित लोगों को सामाजिक नोटिस जारी कर कार्रवाई भी की गई।

विवाह में DJ पूरी तरह प्रतिबंधित

बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि आने वाले विवाह सीजन में शादी समारोहों में डीजे पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। समाज का मानना है कि तेज आवाज और आधुनिक DJ संस्कृति के कारण पारंपरिक गीत-संगीत और सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। वरिष्ठों ने कहा कि विवाह जैसे पारंपरिक आयोजनों में लोक संस्कृति और रीति-रिवाजों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

छठी कार्यक्रमों में नशापान पर भी रोक की मांग

समीक्षा बैठक में केवल DJ ही नहीं बल्कि अन्य सामाजिक कुरीतियों पर भी चर्चा हुई। समाज ने छठी कार्यक्रमों में नशापान बंद करने का आह्वान किया। समाज के वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि सामाजिक आयोजनों में शराब और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से पारिवारिक और सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है। इसलिए लोगों से सादगी और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई।

रिसेप्शन में बफे सिस्टम बंद करने पर जोर

हल्बा समाज ने रिसेप्शन कार्यक्रमों में बफे सिस्टम बंद करने की भी अपील की है। समाज का मानना है कि पारंपरिक बैठकर भोजन कराने की व्यवस्था सामाजिक एकता और सम्मान की भावना को मजबूत करती है। वरिष्ठों ने कहा कि आधुनिक दिखावे की होड़ में पारंपरिक व्यवस्थाएं धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं, जिसे बचाना जरूरी है।

युवाओं को परंपरा से जुड़ने की सीख

बैठक में समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने युवाओं को सामाजिक मर्यादा और परंपराओं से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों की जानकारी होना जरूरी है। समाज प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि युवा अपनी जड़ों से कटेंगे तो आने वाले समय में पारंपरिक पहचान कमजोर पड़ जाएगी।

संस्कृति संरक्षण के लिए एकजुट हुआ समाज

बैठक में मौजूद समाज के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर संस्कृति संरक्षण का संदेश दिया। सभी ने सामाजिक नियमों का पालन सुनिश्चित कराने और परंपराओं को बचाने के लिए मिलकर काम करने की बात कही। समाज का कहना है कि यह फैसला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सामूहिक सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।

नियम तोड़ने वालों पर रहेगी नजर

समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले विवाह सीजन में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर सामाजिक कार्रवाई भी की जाएगी। बैठक में यह भी कहा गया कि समाज की परंपराएं और अनुशासन ही उसकी असली ताकत हैं और इन्हें बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।