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कोंडागांव में पूर्वजों की कब्र पर ईंट प्लांट! आदिवासी समाज में भारी आक्रोश, बोले- जिंदा तो छोड़ो, मरने के बाद भी जगह नहीं

Chhattisgarh Tribal Protest: कोंडागांव जिले में पीढ़ियों से चले आ रहे मरघाटी (कब्र स्थल) की जमीन पर अवैध रूप से फ्लाई ऐश ईंट प्लांट लगाए जाने के आरोप से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

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Kondagaon Brick Plant

पूर्वजों की कब्र पर ईंट प्लांट! (photo source- Patrika)

Kondagaon Brick Plant: छत्तीसगढ़ के माकड़ी विकासखंड में गोंडवाना समाज और एक निजी पक्ष के बीच जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। समाज का आरोप है कि एचपी पेट्रोल पंप के पीछे स्थित लगभग 1.5 एकड़ भूमि, जिसे वे अपने पूर्वजों के मरघाटी (मठ) स्थल के रूप में पीढ़ियों से उपयोग करते आ रहे हैं, वहां अवैध रूप से फ्लाई ऐश ईंट प्लांट स्थापित किया गया है। समाज ने इसे उनकी आस्था, परंपरा और संस्कृति के साथ छेड़छाड़ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

गोंडवाना समाज माकड़ी का दावा

गोंडवाना समाज अपने पूर्वजों के मठ (मरघाटी) स्थल पर एक व्यक्ति के द्वारा व्यावसायिक उपयोग करने के लिए समाज की आस्था और संस्कृति से छेड़छाड़ करते हुए अवैध रूप से फ्लाई एस ईट प्लांट स्थापित किये जाने का विरोध करता आ रहा है। अब मामला तहसीलदार व एसडीएम कार्यालय तक पहुच गया है, जहाँ जिम्मेदारो ने नियमानुसार कार्यवाही करने की बात कही है।

दरअसल मामला माकड़ी विकासखण्ड के पंचायत माकड़ी का ही है जहां एचपी पेट्रोल पंप के पीछे तकरीबन 1.5 एकड़ जमीन पर अपना पट्टा होने की बात कहते हुए बिरस/गौतम साहू के द्वारा ईट प्लान्ट स्थापित किया गया है। जबकि गोंडवाना समाज माकड़ी का यह दावा है कि, इस जमीन पर पीढ़ी से चली रह परंपरा और रीति- रिवाज के साथ वे अपने पूर्वजों का कफन दफन करते आ रहे हैं। जिनके मठ आज भी यहां पर मौजूद हैं वहीं कुछ मठ को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है तो कुछ को मुरुम- मिट्टी डालकर और नीचे दबा दिया गया। जिससे समाज आक्रोशित हो उठा है।

ग्रामीणों की आवाज

गोंडवाना समाज माकड़ी की महिला प्रकोष्ठ ब्लॉक अध्यक्ष रूखमणी नेताम कहती है कि, जिसने भी हमारे इस आस्था पर चोट पहुंचाई है उसने बहुत गलत किया है। समाज ने पहले भी इसका विरोध निर्माण के दौरान किया था,लेकिन वह हमारी सुन ही नहीं रहे। हम अपने पूर्वजों की इस स्थल को आखिर कैसे छोड़ दें इसलिए हमने भी नियमानुसार आवेदन कर जांच की मांग की है।

बालमती कहती है कि, जिस स्थल पर हमारे पूर्वजो का मठ बना है उस जमीन को लेने के लिए हम कुछ भी कर सकते है। क्योंकि यह हमारी आस्था व संस्कृति का मामला है, आज घर बनाने को जमीन नहीं मिल रही है तो क्या मरने के बाद भी यही स्थिति होगी हम ऐसा होने देना नही चाहते। इसलिए इस जमीन के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगा।

समाज के बुजूर्ग दशरथ नेताम कहते है कि, जहां दशकों से मरघट के रूप में जिस जमीन का उपयोग समाज के द्वारा किया जा रहा है। आखिर इसका मालिकना हक कैसे किसी का हो सकता है। और वह हमारे पूर्वजों के मठों को क्षतिग्रस्त करता जा रहा है, तो हम शांत कैसे रह सकते है, यह जमीन मरघट के रूप में उपयोग होती रही है।