Bypass construction controversy: नेशनल हाईवे बाईपास परियोजना में गलत अलाइनमेंट के कारण करीब 8,159 पेड़ गलत जगह काट दिए गए।
NH Bypass Project: नेशनल हाईवे बाईपास परियोजना में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन विभाग और नेशनल हाईवे विभाग की चूक के कारण जहां जरूरत नहीं थी, वहां हजारों हरे-भरे पेड़ काट दिए गए। गलत अलाइनमेंट के चलते यह पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंचा है। वन विभाग के उप सचिव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पीसीसीएफ से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016-17 में बायपास के लिए 11 किलोमीटर का अलाइनमेंट तय हुआ था, लेकिन इसमें से करीब 5 किलोमीटर का हिस्सा गलत चिह्नित किया गया। इसके परिणामस्वरूप लगभग 8,159 पेड़ गलत जगह काट दिए गए। अब जब परियोजना दोबारा शुरू होने जा रही है, तो करीब 6 हजार और पेड़ों की कटाई की तैयारी है, जिससे पर्यावरण को दोहरा नुकसान होने की आशंका है।
केशकाल डीएफओ दिव्या गौतम ने बताया कि मार्च में नेशनल हाईवे विभाग से गलत कटाई की जानकारी मिली थी। उन्होंने मामले की जांच के लिए वन विभाग की टीम गठित कर पुन: सर्वे शुरू करवाया है। स्वीकृत अलाइनमेंट का मौके पर सत्यापन कर दोबारा मार्किंग की जा रही है। केशकाल कलेक्टर ने भी शासन स्तर पर बातचीत कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि कम से कम पेड़ काटते हुए बायपास निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा।
NH Bypass Project: हसदेव अरण्य केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
बिलासपुर हाईकोर्ट ने हसदेव अरण्य क्षेत्र को बचाने के लिए दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को निरस्त कर दिया।
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आर्थिक मुआवजा पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता, भले ही यह विचार सैद्धांतिक रूप से आकर्षक लगे। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि जब भूमि अधिग्रहण और वन डायवर्जन के लिए विधिवत कानूनी मंजूरी मिल चुकी हो और परियोजना पर लंबे समय से काम चल रहा हो, तब न्यायालय उस स्थापित कानूनी ढांचे को दरकिनार नहीं कर सकता।