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3.55 करोड़ की नहर लाइनिंग पर विवाद, किसानों ने पूछा- नहर बना रहे या नाली? ग्रामीणों ने जताई भविष्य की चिंता

Chhattisgarh News: बलौदाबाजार में जल संसाधन विभाग की 3.55 करोड़ रुपए की नहर लाइनिंग परियोजना अब विवादों में घिर गई है।

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3.55 करोड़ की नहर लाइनिंग पर विवाद (फोटो सोर्स- पत्रिका)

3.55 करोड़ की नहर लाइनिंग पर विवाद (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Chhattisgarh News: बलौदाबाजार में जल संसाधन विभाग की एक अजीबोगरीब कार्यप्रणाली ने क्षेत्र के किसानों और आम जनता के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। फसलों की सिंचाई और तालाबों को भरने के लिए बनी जीवनदायिनी नहर को विभाग अब नाली का स्वरूप दे रहा है। करोड़ों की लागत से हो रहे इस नवाचार ने तकनीकी मापदंडों और भविष्य की जरूरतों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल जल संसाधन विभाग द्वारा 14 नंबर नहर की वितरक शाखा में सांवरा डेरा से लेकर कोकड़ी पुल तक कुल 7 किलोमीटर की दूरी में नहर लाइनिंग का कार्य कराया जा रहा है। इस कार्य की कुल लागत 355.11 लाख रुपए है, जिसका जिम्मा बिलासपुर के ठेकेदार अच्छे लाल अग्रवाल को सौंपा गया है।

विडंबना यह है कि जहां आधी नहर को परंपरागत चौड़े स्वरूप में बनाया गया है, वहीं बलौदा बाजार शहर से कोकड़ी तक इसे एक संकरी नाली में तब्दील किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और पर्याप्त तराई (क्यूरिंग) न होने पर भी सवाल उठाए हैं, जिससे भारी भ्रष्टाचार की बू आ रही है।

भूजल रिचार्ज पर मंडराया संकट

सिविल लाइन बलौदाबाजार और ग्राम कोकड़ी के निवासियों का तर्क है कि नहर केवल सिंचाई का साधन नहीं, बल्कि भूजल रिचार्ज का मुख्य स्रोत है। जब भी नहर में पानी छोड़ा जाता है, आसपास के सूखे बोरवेल दोबारा जीवित हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि "नालीनुमा स्ट्रक्चर" बन जाने के बाद पानी जमीन के भीतर नहीं जा पाएगा, जिससे भविष्य में वाटर लेवल गिरने की पूरी संभावना है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यह परियोजना जनता के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है।

भू-माफिया व रसूखदार की नजर

परंपरागत चौड़ी नहर के दोनों ओर विभाग की अपनी जमीन होती है और आवाजाही का रास्ता होता है। ग्रामीणों को डर है कि नहर को संकरा कर नाली बनाने से किनारों की खाली पड़ी कीमती जमीन पर भू-माफिया और रसूखदार लोग अतिक्रमण कर लेंगे। भविष्य में विभाग अपनी इस जमीन को कैसे सुरक्षित रखेगा, इसके बारे में अधिकारियों के पास कोई स्पष्ट प्लान नहीं है। आरोप लग रहे हैं कि महज सरकारी बजट को खपाने के लिए बिना किसी दूरदर्शिता के यह निर्माण कराया जा रहा है।

विवादित तर्क: भविष्य में बनेगी सड़क

इस पूरे विवाद पर जल संसाधन विभाग के एसडीओ ए.के. नागपुरे का कहना है कि उच्च अधिकारियों की सहमति और स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के आधार पर ही यह कार्य हो रहा है। उन्होंने एक चौंकाने वाला तर्क देते हुए कहा कि भविष्य में नगर पालिका इसके ऊपर सड़क का निर्माण कर सकती है, इसलिए इसे नाली का स्वरूप दिया गया है। अधिकारियों के इस दावे के बावजूद स्थानीय जनता में असंतोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि विभाग का काम नहर सुरक्षित करना और सिंचाई सुनिश्चित करना है, न कि सड़क निर्माण के नाम पर नहर के अस्तित्व को ही नाली में बदल देना।