डीजीएमएस की रिपोर्ट को दबा देते है एरिया के अधिकारी
कोरबा. सुरक्षा की नियमों की अनदेखी और उत्पादन के दबाव से कोयला खदान में काम करने वाले कर्मचारियों की जान पर बल आ रही है। आठ माह में १० श्रमिक अलग अलग खदान में मारे गए हैं। आठ लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके बावजूद खदानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है। सुरक्षा के लिए कंपनी की ओर से जारी गाइड लाइन को एरिया अफसर और ठेका कंपनियों ने फाइलों में सिमटा कर रख दिया है।
दो दिन पहले एसईसीएल की कुसमुंडा खदान में टीपर ड्राइवर की मौत भी सुरक्षा नियमों की अनदेखी का परिणाम है। हालांकि घटना के कारण की जांच खान सुरक्षा महानिर्देशालय की एक टीम ने कुसमुंडा पहुंचकर चालू कर दी है। इसबीच एरिया पीट कमेटी और एरिया सुरक्षा कमेटी ने घटना स्थल का दौरा किया है। घटना पर अपनी राय व्यक्त की है। कमेटी के सुझाव पर प्रबंधन अमल करता है या नहीं। यह तो आगे स्पष्ट होगा। लेकिन इसमें बताया जा रहा है कि ठेका कंपनी सिद्धि विनायक का टीपर ब्रेक डाउन होकर खराब हो गया था। टीपर सड़क पर खड़ा था। इस बीच इसी कंपनी का दूसारा ड्रााइवर विजय राम पीछे से खड़ी टीपर को अपनी गाड़ी से टक्कर मार दिया। घटना में गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। विजय गाड़ी की केबिन में दब गया। बचाव कार्य में देरी से विजय की मौत हो गई। ऐसी ही दुर्घटनाएं एसईसीएल की कई कोयला खदानों में हुई है। इसके बाद कंपनी की इंटर सेफ्टि आर्गेनाजेशन ने एक सभी एरिया के जीएम को एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि अगर कोई गाड़ी ब्रेक डाउन होकर सड़क पर खड़ी होती है तो इसके आगे पीछे मिट्टी या कोयला को अनलोड किया जाए। ताकि दुर्घटना से बची जा सके। लेकिन इसका पालन कुसमुंडा में नहीं किया गया।
ठेका श्रमिक को नहीं मिलता मुआवजा
कोल इंडिया ने खदान में ठेका श्रमिक की मौत पर पांच लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की है। लेकिन अभीतक एसईसीएल में इसका क्रियान्वयन नहीं हुआ है। कर्मी की मौत पर परिजन को पांच लाख रुपए की सहायता राशि नहीं मिली है। हाल में हुई स्टैंडराइजन कमेटी की बैठक में भी यूनियन की ओर से मामले को उठाया गया था। बैठक की अध्यक्षता कर रहे कोयला मंत्री ने नाराजगी व्यक्त करते हुए मुआवजा देने का आदेश अफसरों को दिया था।
इस साल इनकी हुई मौत
मानिकपुर :
दो फरवरी की रात करीब 3.45 बजे एसईसीएल की मानिकपुर खदान में काम करने वाला ठेका श्रमिक रंजित कुमार खुसरो की ब्लॉस्टिंग के चपेट मे आकर मौत हो गई। रंजित निजी ठेका कंपनी में टायर वेस्ड ड्रील मशीन चला रहा था। इस दौरान तेज आवाज हुई। रंजित की मौत हो गई।
विजय वेस्ट :
13 जनवरी को एसईसीएल के विजय वेस्ट खदान में ठेका श्रमिक राजेश कुमार की मौत हो गई। वह खदान में सीएम मशीन से फेस में कटिंग कर रहा था। इसबीच रूफ फॉल की घटना हुई। राजेश और उसके साथी दब गए। राजेश की मौत हो गई। इस मामले के बाद भी प्रबंधन नहीं चेता।
गेवरा :
सात मार्च को डंपर ऑपरेटर धीरेन्द्र मालाकार की गेवरा खदान में मौत हो गई। वह लोड लेने के लिए कोयले की फेस के पास गाड़ी को मोड़ रहा था। इसबीच डंपर ड्राइवर साइड से पानी में पलट गई। धीरेन्द्र मालाकार की घटना स्थल पर मौत हो गई।
कुसमुंडा :
एसईसीएल के कुसमुंडा खदान में 12 जुलाई को ठेका कंपनी बीजीआर के सुपरवाइजर राकेश कुमार पटेल की मौत हो गई। राकेश कुसमुंडा खदान में पोकलेन मशीन के ऑपरेटर को कुछ बताकर पीछे की ओर खड़ा था। इस बीच बीजीआर के टीपर ने राकेश को पीछे से कुचल दिया था।
-सबसे अधिक दुर्घटनाएं सुरक्षा नियमों की अनदेखी से होती है। हर दुर्घटना की जांच खान सुरक्षा महानिर्देशालय करता है। रिपोर्ट को सार्वजनिक करता है,जो एरिया के सूचना पटल पर चस्पा होता है।
लक्ष्मण चन्द्रा, अल्टरनेट मेंबर, जेबीसीसीआई
-खदान में श्रमिक की मौत पर पांच लाख रुपए देने का प्रवधान है। इसे ठेका कंपनी की ओर से दिया जाना है। अगर ठेका कंपनी नहीं देती तो एसईसीएल कंपनी के बिल से राशि काटकर भुगतान कर सकती है।
वीएम मनोहर, श्रमिक नेता सीटू