ड्राप आउट छात्रों की संख्या में सौ फीसदी की गिरावट आ गई और हर छात्र अब १०वीं व १२वीं में पूरी मेहनत के साथ पढ़ाई कर रहा है।
कोरबा. अब तक जिस क्षेत्र के स्कूलों में बच्चे सिर्फ नोट गिनने के काबिल होने तक की शिक्षा लेते थे। आठवीं के बाद सैकड़ों छात्र-छात्राएं पढ़ाई छोड़ देते थे। गांव के कुछ लोगों ने इसे गंभीरता से लिया। ऐलान किया गया कि गांव का जो भी बच्चा १०वीं या फिर १२वीं में गांव मेें टॉप करेगा। उसे ५-५ हजार रूपए का इनाम दिया जाएगा। बस फिर क्या था ड्राप आउट छात्रों की संख्या में सौ फीसदी की गिरावट आ गई और हर छात्र अब १०वीं व १२वीं में पूरी मेहनत के साथ पढ़ाई कर रहा है।
जिला मुख्यालय से लगभग ९५ किलोमीटर एनएच पर बसे गांव मोरगा आदिवासी बाहुल्य गांव है। बमुश्किल १५ सौ की आबादी वाले इस गांव में तीन स्कूल है। पिछले १५-२० साल से गांव के इन स्कूलों में ८वीं तक की क्लास में छात्रों की भीड़ देखते बनती थी। यहां के सरपंच जयसिंह पैकरा बताते हैं कि अमूमन आठवीं के बाद यहां पढ़ाई को लेकर बच्चों में जागरूकता नहीं है। अक्सर बच्चे आठवीं के बाद ही रोजी मजदूरी में लग जाते थे।
हर घर से चंदा, इस बार चार छात्रों को मिला इनाम
ग्राम पंचायत द्वारा इसके लिए हर घर से चंदा किया गया। शनिवार को स्कूल के ऐेसे चार प्रतिभावान छात्रों को ५-५ हजार रूपए का इनाम दिया गया। नेहरू स्मारक हायर सेकेण्डी स्कूल के मिथलेश यादव, जय प्रकाश साहू, मालवट कुमार व खगेन्द्र प्रताप सिंह को सरपंच जयसिंह पैकरा व उपसरपंच सुनील अग्रवाल ने राशि भेंट की।
एक साल में बदल गई तस्वीर, ड्राप आउट हुआ जीरो
इस प्रयोग का एक साल में परिणाम सामने आने लगा। पिछले साल से शुरू हुए इस प्रयोग से ड्राप आउट छात्रों की संख्या जीरो हो गई। गांव वाले भी इससे अंचभित है। ऐसा कभी नहींं होता था जब ९वीं व १०वीं में छात्रों की उपस्थिति अधिक दर्ज होने लगी है। यह मोरगा गांव के लिए अब चर्चा का विषय बन चुका है।